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शुभमन गिल पिछले 6 महीने में भारत के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले बैटर्स में से एक हैं. वो उन चुनिंदा बैटर्स में से एक हैं जो तीनों फॉर्मेट में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके बावजूद बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट सीरीज में गिल जगह बेंच पर बैठे दिखाई दे रहे हैं. ऐसा भी नहीं है कि टीम के बाकी बल्लेबाज उम्दा प्रदर्शन ही कर रहे हों. जब टीम के बाकी बल्लेबाज औसत प्रदर्शन कर टीम में बने रहें और कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करके भी बाहर बैठा रहे तो उसकी सोच पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. वह सोच सकता है कि जब रन बनाकर भी टीम में जगह नहीं बन रही तो आखिर उसे करना क्या चाहिए. शुभमन गिल के दिमाग में भी अगर इन दिनों ऐसे ही विचार आ रहे हों तो हैरानी नहीं होनी चाहिए.
दरअसल भारतीय टीम मैनेजमेंट इन दिनों जिस मनोदशा से गुजर रहा है, वह किसी भी टीम प्रबंधन के लिए परेशानी का सबब ही होता है. एक तरफ भारतीय मैनेजमेंट को अपने सीनियर खिलाड़ी (केएल राहुल) पर पूरा भरोसा जताना है. एक खिलाड़ी, जो 8-10 साल से टीम के साथ है, अगर उसके बुरे वक्त में मैनेजमेंट उसका साथ नहीं देता तो फिर उस खिलाड़ी में इनसिक्योरिटी घर सकती है. हमेशा कहा जाता है कि फॉर्म आती-जाती रहती है, लेकिन क्लास परमानेंट होती है. केएल ने भी लॉर्ड्स से लेकर सेंचुरियन तक शतक जमाकर यह दिखाया है कि जब वे लय में होते हैं किसी भी बॉलिंग अटैक की बखिया उधेड़ सकते हैं.
दूसरी ओर, शुभमन गिल ने पिछले 6-8 महीने में टेस्ट और टी20 क्रिकेट में शतक लगाया है. वनडे क्रिकेट में तो वो दोहरा शतक लगा चुके हैं. इतने के बावजूद अगर गिल प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठे हैं और टीम का दूसरा ओपनर रन नहीं बना पा रहा है तो उनका धैर्य चुक सकता है. क्रिकेट का सर्वमान्य सिद्धांत यह है कि किसी खिलाड़ी को मौका देने का सर्वश्रेष्ठ वक्त वह होता है, जब वह फॉर्म में हों. इस बात में कोई शक नहीं कि शुभमन गिल इस समय बेहतरीन लय में हैं और उन्हें बाहर रखना टीम हित में नहीं कहा जा सकता.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आउट ऑफ फॉर्म सीनियर पर भरोसा जताया जाए या इनफॉर्म युवा को मौका दिया जाए. मुझे लगता है कि दूसरा विकल्प चुनना सही होगा. उचित यही होगा कि इनफॉर्म शुभमन गिल को प्लेइंग इलेवन शामिल किया जाए और केएल राहुल का भरोसा बनाए रखते हुए उन्हें ब्रेक दिया जाए. अक्सर ऐसे समय में ब्रेक फायदेमंद होता है. केएल राहुल इतने टैलेंटेड प्लेयर हैं कि ऐसा सोचना कि उनका करियर खतरे में है, गलतफहमी होगी. केएल को अगर ब्रेक भी दिया जाता है तो वह वापसी जरूर करेंगे.
एक और तुलना जो इस समय हो रही है वह केएस भरत और ईशान किशन की है. केएस भरत इस समय भारत के सबसे बेहतरीन विकेटकीपरों में से एक है. उन्होंने भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में बेहतरीन विकेटकीपिंग की है. लो विकेट पर स्पिनरों की गेंद पर कीपिंग करना आसान नहीं होता है. केएस भरत ने यह काम बड़ी आसानी से किया है. उन्हें सीरीज के बाकी मैचों में भी मौका मिलना चाहिए. ऐसे में लगता है कि ईशान किशन के फैंस को अपने सितारे को वॉइट जर्सी में देखने के लिए शायद और इंतजार करना पड़ेगा.
(लालचंद राजपूत 1985 से 1987 तक भारत के लिए खेले. भारतीय टीम के कोच रह चुके हैं. इन दिनों जिम्बाब्वे की नेशनल टीम के टेक्निकल डायरेक्टर हैं.)
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Tags: India vs Australia, KL Rahul, Shubman gill
FIRST PUBLISHED : February 28, 2023, 20:23 IST
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