Home Breaking News जुनैद-नासिर हत्याकांड: DNA जांच में बड़ा खुलासा, स्कॉर्पियो में मिला खून जुनैद-नासिर का, पीटकर हत्या की

जुनैद-नासिर हत्याकांड: DNA जांच में बड़ा खुलासा, स्कॉर्पियो में मिला खून जुनैद-नासिर का, पीटकर हत्या की

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जुनैद-नासिर हत्याकांड: DNA जांच में बड़ा खुलासा, स्कॉर्पियो में मिला खून जुनैद-नासिर का, पीटकर हत्या की

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जुनैद-नासिर हत्याकांड में जींद की सोमनाथ गोशाला से राजस्थान पुलिस ने जो स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की थी, उसमें मिले रक्त के नमूने जुनैद और नासिर के ही हैं। इसकी पुष्टि राजस्थान पुलिस ने जारी डीएनए रिपोर्ट से की है। भरतपुर के एसपी श्याम सिंह ने कहा कि गाड़ी में जो खून के धब्बे मिले थे, उसकी डीएनए जांच राजस्थान पुलिस ने करवाई थी। यह रक्त के नमूने जुनैद व नासिर के रक्त के नमूनों से मैच हो गए हैं। इससे साफ है कि इस गाड़ी में दोनों के साथ मारपीट हुई और बाद हत्या की गई थी।

जींद से बरामद गाड़ी के मामले की जांच करेंगे नगराधीश

हत्याकांड में सामने आई स्कॉर्पियो गाड़ी का सरकारी कनेक्शन मिलने के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। डीसी डॉ. मनोज कुमार ने इसे गंभीरता से लेते हुए नगराधीश अमित कुमार को अभी तक यह गाड़ी खरीदने वाले के नाम क्यों नहीं हुई, इसकी जांच सौंपी है।

खुद जिला परिषद के सीईओ विनेश कुमार भी जिला परिवहन विभाग में इस बात का पता लगाएंगे कि किन कारणों से यह गाड़ी अभी तक खरीदने वाले के नाम नहीं हो पाई। डीसी ने सभी विभागाध्यक्षों को सख्त आदेश जारी किए हैं कि जो भी वाहन की नीलामी हो जाए उसे तुरंत खरीदने वाले के नाम करवाया जाए। यदि इसमें किसी कर्मचारी या अधिकारी ने लापरवाही की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



राजबीर के पास कैसे आई गाड़ी, इसकी होगी जांच

हत्याकांड में प्रयोग की गई सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी को राजस्थान पुलिस ने 19 फरवरी को जींद की सोमनाथ गोशाला से बरामद किया था। पुलिस ने जब इस गाड़ी की डिटेल खंगाली तो पता चला कि यह गाड़ी जिला परिषद के सीईओ के नाम पर पंजीकृत है। जिला परिषद ने इस गाड़ी को 2020 में नीलाम कर दिया था, जिसे किसी बालाजी ट्रेडर्स ने खरीदा था। इसके बाद यह गाड़ी राजबीर के पास कैसे आई, इसका भी अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।

जिला परिषद ने गाड़ी तो नीलाम कर दी, लेकिन इसको खरीदने वाले के नाम ट्रांसफर नहीं करवाई, जिस कारण जिला प्रशासन पर इस मामले में उंगली उठ रही है। वहीं जिला परिषद के सीईओ विनेश कुमार ने इस गाड़ी की नीलामी से संबंधित सभी कागजात खंगाल लिए हैं। जिस कंपनी ने यह गाड़ी खरीदी थी, उसकी तरफ से शपथ-पत्र दिया गया है कि जब तक यह गाड़ी उनके नाम नहीं हो जाती, तब तक वह इस गाड़ी का प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन इसके बावजूद गाड़ी प्रयोग की गई और बड़े हत्याकांड में इस गाड़ी का संलिप्तता उजागर हुई। विनेश कुमार ने कहा कि वह खुद जिला परिवहन कार्यालय में मंगलवार को सभी दस्तावेज लेकर जाएंगे और गाड़ी खरीदने वाले के नाम क्यों नहीं की गई, इस बारे में पता लगाएंगे।


बिजली मंत्री को लगा छोटा-मोटा मामला

गाड़ी खरीदने वाले के नाम नहीं करवाने और सरकार पर उंगली उठने के मामले में जब सोमवार को जींद आए बिजली मंत्री रणजीत सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बाइक, गाड़ी चोरी होना छोटी-मोटी बात है। जब उनसे सवाल किया गया कि यह दो लोगों के मर्डर से जुड़ा मामला है तो उन्होंने कहा कि इस बारे में गृह मंत्रालय बता सकता है।


विकास और राजबीर के बारे में कोई सुराग नहीं लगा पाई राजस्थान पुलिस

पिछले नौ दिनों से जींद में डेरा जमाए बैठी राजस्थान पुलिस पहले विकास को पकड़ने के लिए आई थी। जुनैद-नासिर हत्याकांड में सफीदों रोड निवासी विकास के खिलाफ मामला दर्ज है। हालांकि पुलिस ने यहां से स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद कर ली थी, जिसके बाद राजबीर का नाम सामने आया है, लेकिन आज तक राजस्थान पुलिस न तो विकास के बारे में कोई पता लगा पाई और न ही राजबीर के बारे में।


यह स्कॉर्पियो गाड़ी खरीदने वाले के नाम क्यों नहीं हो पाई, इस मामले की जांच नगराधीश अमित कुमार को सौंपी गई है। भविष्य में सभी अधिकारियों को किसी भी वाहन की बोली करवाने के तुरंत बाद खरीदने वाले के नाम गाड़ी करवाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. मनोज कुमार, डीसी।


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