Home Sports सचिन के सामने वसीम अकरम का ट्रंप कार्ड भी था बेअसर, मार-मारकर खोल दिए थे धागे, फिर एक चाल ने पलट दी बाजी

सचिन के सामने वसीम अकरम का ट्रंप कार्ड भी था बेअसर, मार-मारकर खोल दिए थे धागे, फिर एक चाल ने पलट दी बाजी

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सचिन के सामने वसीम अकरम का ट्रंप कार्ड भी था बेअसर, मार-मारकर खोल दिए थे धागे, फिर एक चाल ने पलट दी बाजी

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हाइलाइट्स

जब सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान को दिन में दिखाए थे तारे
अकेले दम पर टेस्ट जीत की दहलीज तक ले गए थे

नई दिल्ली. भारत और पाकिस्तान जब भी क्रिकेट मैदान में आमने-सामने होते हैं तो टक्कर जबरदस्त होती है. आखिरी गेंद तक दोनों टीमें जीत के लिए संघर्ष करती हैं. अतीत में ऐसे कई मुकाबले हुए हैं, जिसमें ये बात साबित भी हुई है. ऐसी ही एक मुकाबला 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच चेन्नई में हुआ था. ये टेस्ट मैच पाकिस्तान जीता था. लेकिन, दिल सचिन तेंदुलकर ने जीता था. सचिन कमर में दर्द होने के बावजूद आखिर तक डटे रहे थे और 136 रन की पारी खेली थी. उनके आउट होते ही भारतीय टीम लड़खड़ा गई थी और भारतीय टीम 17 रन नहीं बना पाई थी.

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हुआ चेन्नई टेस्ट 12 रन से जीता था. इस टेस्ट में वसीम अकरम पाकिस्तान के कप्तान थे और सकलैन मुश्ताक ने भारतीय बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा परेशान किया था. सकलैन ने इस टेस्ट की दोनों पारियों में मिलाकर कुल 10 विकेट लिए थे. लेकिन, वसीम अकरम का ये ट्रंप कार्ड सचिन तेंदुलकर के आगे बेअसर रहा था. सचिन को आउट करने के लिए पाकिस्तान को काफी पसीना बहाना पड़ा था.

सचिन के लिए बनाया था खास प्लान: अकरम
वसीम अकरम ने स्पोर्ट्स स्टार से बातचीत में ये बताया था कि आखिर कैसे उन्होंने सचिन को आउट कर, 1999 में चेन्नई टेस्ट जीता था. अकरम के मुताबिक, सचिन तेंदुलकर उस टेस्ट में सकलैन मुश्ताक की ‘दूसरा’ को बड़ी आसानी से पढ़ रहे थे और उनके खिलाफ आसानी से शॉट खेल रहे थे.

‘सकलैन की ‘दूसरा’ को सचिन अच्छे से खेल रहे थे’
अकरम ने आगे बताया, “चेन्नई टेस्ट मेरे लिए बेहद खास है. मुझे याद है कि टेस्ट मैच के दौरान मौसम काफी गर्म था और पिच में भी रफ थे. ये हमारी गेंदबाजी के अनुकूल था. क्योंकि हम ऐसे विकेट पर आसानी से रिवर्स स्विंग करा सकते थे. तब हमारे पास सकलैन मुश्ताक के रूप में दुनिया का बेस्ट स्पिनर भी था. कोई भी बल्लेबाज मुश्ताक की दूसरा गेंद को नहीं पढ़ पा रहा था. लेकिन, सचिन तेंदुलकर ने पहली पारी के बाद सकलैन के खिलाफ अच्छी बल्लेबाजी की.”

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान के मुताबिक, सकलैन मुश्ताक ने जितनी बार सचिन तेंदुलकर के खिलाफ दूसरी पारी में ‘दूसरा’ (गेंद) का इस्तेमाल किया. हर बार मास्टर ब्लास्टर ने विकेटकीपर के पीछे लैप शॉट खेला. आमतौर पर दूसरा कोई बल्लेबाज ऐसा शॉट खेलने का जोखिम नहीं उठाता. लेकिन, सचिन ने ऐसा किया. यही वजह है कि वो महान खिलाड़ी कहलाते हैं.

अकरम ने इसी इंटरव्यू में बताया था कि कैसे उन्होंने सचिन तेंदुलकर को जाल में फंसाया था. अकरम ने बताया, मुझे याद है कि मैच काफी रोमांचक हो गया था. भारत को 20 रन चाहिए थे. सचिन तेंदुलकर 136 रन पर खेल रहे थे. मुझे याद है कि मैंने एक गेंद पहले सकलेन से बात की थी. हर फील्डर बाउंड्री पर था. मैंने सकलैन से कहा कि वह अपना दूसरा ऑफ स्टंप के बाहर फेंके और गेंद को थोड़ी फ्लाइट दें. क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा था कि सचिन मिडविकेट की तरफ शॉट खेलने की कोशिश करेंगे और ऐसा ही हुआ. सचिन ने मिड विकेट की तरफ हवाई शॉट खेला. गेंद बल्ले पर नहीं आई और हवा में काफी ऊपर गई. मैं गेंद के नीचे था और मन ही मन था और खुद से कह रहा था कि गेंद पर आंखें जमाए रखो और आखिरकार मैंने कैच पकड़ लिया. सचिन के आउट होते ही हमने मैच भी जीत लिया.

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अकरम ने आगे कहा कि मुझे आज भी याद है कि तब स्टेडियम में 40 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे और सबने पाकिस्तान टीम का तालियां बजाकर स्वागत किया था. इसी वजह से मेरे लिए चेन्नई टेस्ट यादगार रहेगा.

Tags: India Vs Pakistan, Sachin tendulkar, Wasim Akram

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