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Rahul Gandhi
– फोटो : Social Media
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में अपने व्याख्यान के दौरान सुनने की कला (art of listening) पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक माहौल को बढ़ावा देने के लिए नई सोच का आह्वान किया। हमें जबरन डाले जाने वाले दबाव का विरोध करना होगा। राहुल ने हालिया वर्षों में भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देशों में विनिर्माण में गिरावट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने बड़े पैमाने पर असमानता और नारजगी को जन्म दिया है। इस पर तत्काल ध्यान देने और बात करने की आवश्यकता है।
केरल के वायनाड से कांग्रेस सांसद कैंब्रिज जज बिजनेस स्कूल (कैम्ब्रिज जेबीएस) के विजिटिंग फेलो हैं। उन्होंने मंगलवार शाम को 21 वीं सदी में सीखने के विषय पर विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित किया। राहुल गांधी ने कहा कि हम ऐसे ग्रह का खर्च नहीं उठा सकते, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत काम नहीं कर सकता। इसलिए हमें इस बारे में नई सोच की जरूरत है कि आप कैसे लोकतांत्रिक वातावरण में काम कर सकते हैं, बजाय जबरन दबाव वाले वातारण के।
कैंब्रिज जेबीएस ने कहा कि एमबीए छात्रों के लिए गांधी का व्याख्यान दुनिया भर के लोगों के महत्व के इर्द-गिर्द रहा। ऐसे लोग जो 21वीं सदी में नई चिंताओं को सुनने का एक तरीका खोज रहे हैं। ‘सुनने की कला’ जब लगातार और लगन से की जाती है, तो बहुत शक्तिशाली होती है।
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