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अंतरराष्ट्रीय मॉडल और अभिनेत्री निकिता घाग ने अपना दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवॉर्ड लौटाने का एलान करके मुंबई मनोरंजन जगत में जो हलचल मचाई है, वह थमने का नाम नहीं ले रही। देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय सिनेमा सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से मिलते-जुलते नामों वाले पुरस्कारों का मुंबई में पूरा एक ऐसा सिस्टम बन चुका है, जिसमें भारतीय सिनेमा के दिग्गजों में शुमार दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक शामिल हो चुके हैं। संगीतकार दिलीप सेन इसे दादा साहब फाल्के पुरस्कार को घर-घर पहुंचाने का मिशन मानते हैं तो कुछ आयोजक ऐसे भी हैं जो इस नाम के बूते विदेश तक में अपना कारोबार फैला चुके हैं। आइए आपको बताते हैं कि राष्ट्रीय सिनेमा सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से मिलते जुलते पुरस्कारों की शुरुआत कब और कैसे हुई और अब इस नाम का सहारा लेकर कितने पुरस्कार मुंबई में आयोजित होते हैं…
23 साल पहले हुई शुरुआत
दादा साहब फाल्के के नाम से सबसे पहले दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड की शुरुआत अभिनेता चंद्रशेखर ने साल 2000 में की। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में चंद्रशेखर के पुत्र अशोक शेखर बताते हैं, ‘मेरे पिता दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड के संस्थापक थे और इस अवॉर्ड के ट्रस्टी थे जाने माने फिल्म वितरक संतोष सिंह जैन, जो अब नहीं रहे। दूसरे ट्रस्टियों में फिल्मिस्तान स्टूडियो की मालिक मीना जालान, जॉनी लीवर, मिथुन चक्रवर्ती भी शामिल रहे हैं। अब तक यह अवॉर्ड इंडस्ट्री के 90 प्रतिशत लोगों को मिल चुका हैं, जिनमे दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, अनिल कपूर, रानी मुखर्जी, रणवीर सिंह जैसे सितारे शामिल हैं। इस साल भी दादा साहब के जन्मदिन 30 अप्रैल पर ये पुरस्कार आयोजित करने की योजना बन रही है।’
फाल्के पुरस्कार नंबर 2
दादा साहब फाल्के के जन्मदिन 30 अप्रैल ही फाल्के अवॉर्ड्स के एक और आयोजन की दावेदारी अशफाक खोपेकर की भी रही है। अशफाक के मुताबिक, ‘पहले मैं भी दादा साहब फाल्के अकादमी अवॉर्ड के कमेटी में था। साल 2015 से हमने दादा साहब फाल्के फाउंडेशन के नाम से अपनी एक अलग संस्था बना ली। तब से हम लोग यह अवॉर्ड इसी नाम से हर साल करते आ रहे हैं। इस साल दादा साहब फाल्के के जन्मदिन पर दादा साहब फाल्के फाउंडेशन अवॉर्ड करने की तैयारी जारी है। इस अवॉर्ड समारोह से फिल्म इंडस्ट्री की 35 यूनियन के सदस्य जुड़े हुए हैं। हमारी कमेटी के सदस्य ही तय करते हैं कि अवॉर्ड किसे दिया जाना चाहिए। भारत सरकार की तरफ से मिलने वाला सम्मान तो सबको मिल नहीं सकता, इसलिए हमारी कोशिश यही रहती है कि सिनेमा के क्षेत्र में जिसका योगदान कुछ भी हो उसे सम्मानित किया जाए।’
फाल्के पुरस्कार नंबर 3
कभी संघर्षरत अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बताने वाले अभिनेता कल्याणजी जाना की कहानी इन सबमें सबसे दिलचस्प है। कहते हैं कि उनका रहन सहन ही इन पुरस्कारों ने बदल दिया है। कल्याणजी ने साल 2019 में दादा साहब फाल्के आइकॉन अवॉर्ड फिल्म इंटरनेशनल की शुरुआत की पिछले साल दिसंबर में इस समारोह का आयोजन दुबई में हुआ जिसमें अंकिता लोखंडे, कीकू शारदा, दर्शन कुमार जैसी फिल्म और टीवी जगत से जुड़ी कई हस्तियों को सम्मानित किया गया। कल्याणजी जाना 15 मार्च को दुबई में ये समारोह फिर से करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
फाल्के पुरस्कार नंबर 4
मुंबई में बंटने वाले फाल्के पुरस्कारों में अगला नाम आता है, लीजेंड दादा साहब फाल्के अवॉर्ड का। इसकी शुरुआत कृष्णा चौहान ने तीन साल पहले ही की है। इसी पुरस्कार को लेकर अभिनेता गजेंद्र चौहान सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा ट्रोल हुए थे। गजेंद्र ने इसे लेकर बाद में खूब सफाई भी दी कि उन्होंने अपने पुरस्कार में इसका पूरा नाम साफ साफ लिखा था। वह अब भी यही कहते हैं कि दादा साहब फाल्के के नाम पर होने वाला कोई भी अवॉर्ड नकली नहीं है।
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