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त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। त्रिपुरा और नगालैंड में भाजपा गठबंधन ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि मेघालय में भाजपा की पुरानी सहयोगी एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां भी भाजपा सरकार का हिस्सा बन सकती है।
खैर, चुनावी नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इन राज्यों में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या पुराने चेहरों को फिर से पार्टियां विश्वास जताएंगी या फिर किसी नए चेहरे को कमान मिलेगी? सरकार का स्वरूप कैसा होगा? आइए समझते हैं…
कौन-कौन बन सकता है मुख्यमंत्री?
शुरुआत त्रिपुरा से करते हैं
2018 में यहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी। तब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे बिप्लब कुमार देब को मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि, अभी हाल ही में चुनाव से कुछ महीनो पहले बिप्लब कुमार देब की जगह माणिक साहा को राज्य सरकार की कमान सौंप दी गई। चुनावी रैलियों में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कई बार साफ कर दिया कि माणिक साहा ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, उपमुख्यमंत्री जिश्नु देब वर्मा जरूर चुनाव हार गए हैं। ऐसे में उनकी जगह अब प्रतिमा भौमिक को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। प्रतिमा केंद्रीय मंत्री हैं और उन्हें भाजपा ने धानपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया था। प्रतिमा ने करीब 3500 वोटों से चुनाव में जीत हासिल की है। चर्चा ये भी थी कि प्रतिमा भौमिक को मुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है। हालांकि, अभी इसकी संभावना कम ही दिखती है। टिपरा मोथा भी सरकार का हिस्सा हो सकती है। टिपरा मोथा के मुखिया प्रद्योत देबबर्मा ने भाजपा को समर्थन देने का एलान भी कर दिया है।
नगालैंड में नेफ्यू रियो को फिर मिलेगा ताज
इस बार नगालैंड की 59 सीटों पर चुनाव हुए। यहां जुन्हेबोटो की आकुलुटो सीट से भाजपा प्रत्याशी और निर्वतमान विधायक काजहेटो किन्मी निर्विरोध चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। भारतीय जनता पार्टी और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) का गठबंधन हुआ है। इसके तहत एनडीपीपी ने 40 और भाजपा ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके अलावा कांग्रेस और एनपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़े। कांग्रेस ने 23 और एनपीएफ ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में ताल ठोकी थी।
2018 में यहां विधानसभा के सभी 60 सदस्य सरकार का हिस्सा बन गए थे। मतलब कोई भी विपक्ष में नहीं था। एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बनाए गए थे। इस बार भी भाजपा और एनडीपीपी गठबंधन सीधे तौर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहे हैं। कांग्रेस और एनपीएफ को बड़ा झटका लगा है। दोनों ही पार्टियों ने चुनाव में कुछ खास हासिल नहीं किया। अब मुख्यमंत्री की बात करें तो यहां एनडीपीपी के मुखिया नेफ्यू रियो फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। रियो को भाजपा का समर्थन भी है। इस चुनाव में जेडीयू के चार, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की है। ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का विधायक भी सरकार में शामिल हो सकता है।
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