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भोजपुरी सिनेमा स्क्रीन एंड स्टेज अवार्ड्स 2023 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली आम्रपाली दुबे गोरखपुर में भैंसाबाजार के पास बसे गांव चनहर से ताल्लुक रखती हैं। मनोरंजन जगत में उनकी सफलता की कहानी तमाम उन बेटियों को प्रेरित करने वाली है जिनके सपने यही रहते हैं कि ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’। तमाम फिल्मों के दृश्यों में गुमनाम चेहरा लिए भीड़ का हिस्सा बनती रहीं आम्रपाली ने संयम, संघर्ष और सतत मेहनत से भोजपुरी सिनेमा में अपना एक अलग मुकाम बनाया है ‘अमर उजाला’ ने उनसे की ये खास मुलाकात।
आम्रपाली, हिंदी धारावाहिकों में इतना नाम कमाने के बाद आपका भोजपुरी सिनेमा में आने का संयोग कैसे बना?
सिनेमा से पहले तो धारावाहिक की हीरोइन बनने का संयोग ही बड़ा दिलचस्प है। आपको जानकर यकीन नहीं होगा कि जिस धारावाहिक में मुझे एक्स्ट्रा का काम मिला, उसी धारावाहिक की मैं बाद में हीरोइन बनी। यह धारावाहिक था, ‘सात फेरे’। लीड किरदार मिलने के बाद मैंने अपना पहला दृश्य दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी के साथ किया। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। मुझे याद है मेरा पहला सीन सीढ़ियों से उतरने का था। सीढ़ियों से उतरकर मैं केक काटती हूं और सुरेखाजी को खिलाती हूं। वह इस धारावाहिक में मेरी दादी बनी थीं। सीढ़ियों से जब मैं उतर रही थी तो मेरे पैर कांप रहे थे।
इसके पहले भी आपने एक्स्ट्रा के तौर पर भीड़ में खड़े होने के काम किए?
बहुत सारी फिल्मों में मैं भीड़ का हिस्सा बनी हूं। मेरी शुरुआत ही मनोरंजन जगत में जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर हुई। बहुत सारी हिंदी फिल्में हैं जहां मैं किसी पार्टी सीन में हाथ में ग्लास पकड़े खड़ी दिख जाती हूं। लोग ये फिल्में देखते हैं तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर मुझे भेजते रहते हैं। हीरोइन बनना शायद मेरे लिए कुदरती संयोग है। बचपन में मैं बहुत ही नौटंकीबाज और नखरेवाली थी। लोग मुझे ताना मारते हुए बुलाते थे, ए हीरोइन इधर आ। और, ये लोगों ने इतनी बार कहा कि कायनात ने मुझे हीरोइन बना ही दिया।
भोजपुरी फिल्मों में मैं अपने दादी की ही वजह से मैं आई। मैं धारावाहिकों की शूटिंग करके घर आती थी तो मेरी दादी हमेशा कहतीं, “अरे इतना काम करेलू जिला जवार में केहू नाही जानी त कवन फायदा बा अइसन काम कइले से।” उनको लगता था कि भोजपुरी फिल्में करूंगी तो गांव के लोग भी मुझे पहचानेंगे। वह मुझे अपने पास बिठाकर भोजपुरी चैनलों पर आने वाली फिल्में दिखाती रहती थीं। भोजपुरी फिल्म ‘परिवार’ तो दादी ने मुझे कम से कम 50 बार दिखाई होगी।
फिर कैसे मिला भोजपुरी सिनेमा में पहला ब्रेक?
धारावाहिक ‘सात फेरे’ के बाद मैंने ‘रहना है तेरी पलकों की छाव में’, ‘मायका’, ‘मेरा नाम करेगी रोशन’ जैसे कई धारावाहिकों में काम किया। इसी दौरान मैंने दूरदर्शन के लिए प्रस्तावित एक धारावाहिक का पायलट एपिसोड शूट किया। वहां मेरी मुलाकात संतोष शुक्ला से हुई। वह जब बिग बॉस सीजन 6 में गए तो वहां उनकी मुलाकात दिनेश लाल यादव निरहुआ से हुई। फिल्म ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ के लिए जब हीरोइन की तलाश हो रही थी तो संतोष शुक्ला ने मेरा नाम निरहुआ को सुझाया। मैंने फिल्म की कहानी सुनी और बिना झिझक के तुरंत ये फिल्म साइन कर ली।
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