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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्र सरकार ने सोमवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में ट्विटर द्वारा दायर रोक के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका के खिलाफ अपनी दलीलें पेश कीं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आर शंकरनारायणन ने न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की एकल न्यायाधीश वाली पीठ के समक्ष दलीलें रखीं।
ट्विटर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और अशोक हरनहल्ली ने दिसंबर 2022 में दलीलें पेश की थीं। केंद्र के वकीलों द्वारा मांगे गए समय के कारण केंद्र सरकार के लिए बहस में देरी हुई। एएसजी ने सोमवार को अदालत को सूचित किया कि ट्विटर समीक्षा समिति के समक्ष अवरूद्ध आदेशों को चुनौती देने के लिए पेश नहीं हुआ था, बल्कि उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
केंद्र सरकार ने भारत और यूनाइटेड किंगडम में डिजिटल कानूनों के बीच अंतर का विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही अदालत को उन खाताधारकों का ब्योरा भी दिया गया जिनके ट्विटर हैंडल को आपत्तिजनक सामग्री के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। ट्विटर को जारी किए गए नोटिसों का प्रारूप भी कोर्ट में जमा किया गया। एएसजी ने अधिक विश्लेषण और विवरण पेश करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी।
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