Home Breaking News आज का शब्द: वनिता और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना- इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी

आज का शब्द: वनिता और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना- इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी

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आज का शब्द: वनिता और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना- इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- वनिता, जिसका अर्थ है- नारी, स्त्री। प्रस्तुत है रामधारी सिंह दिनकर की रचना- इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी
                                                                                                
                                                     
                            

वनिता की ममता न हुई, सुत का न मुझे कुछ छोह हुआ,
ख्याति, सुयश, सम्मान, विभव का, त्यों ही, कभी न मोह हुआ।
जीवन की क्या चहल-पहल है, इसे न मैने पहचाना,
सेनापति के एक इशारे पर मिटना केवल जाना।

मसि की तो क्या बात? गली की ठिकरी मुझे भुलाती है,
जीते जी लड़ मरूं, मरे पर याद किसे फिर आती है?
इतिहासों में अमर रहूँ, है एसी मृत्यु नहीं मेरी,
विश्व छोड़ जब चला, भुलाते लगती फिर किसको देरी?
जग भूले पर मुझे एक, बस सेवा धर्म निभाना है,
जिसकी है यह देह उसी में इसे मिला मिट जाना है।
विजय-विटप को विकच देख जिस दिन तुम हृदय जुड़ाओगे,
फूलों में शोणित की लाली कभी समझ क्या पाओगे?

वह लाली हर प्रात क्षितिज पर आ कर तुम्हें जगायेगी,
सायंकाल नमन कर माँ को तिमिर बीच खो जायेगी।
देव करेंगे विनय किंतु, क्या स्वर्ग बीच रुक पाऊंगा?
किसी रात चुपके उल्का बन कूद भूमि पर आऊंगा।
तुम न जान पाओगे, पर, मैं रोज खिलूंगा इधर-उधर,
कभी फूल की पंखुड़ियाँ बन, कभी एक पत्ती बन कर।
अपनी राह चली जायेगी वीरों की सेना रण में,
रह जाऊंगा मौन वृंत पर, सोच न जाने क्या मन में !

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7 hours ago

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