Home Sports पाकिस्तान के खिलाफ एक चौके से चमका, अचानक हुआ टेस्ट डेब्यू, क्रिकेटर पिता का बेटा अब संवार रहा टीम इंडिया

पाकिस्तान के खिलाफ एक चौके से चमका, अचानक हुआ टेस्ट डेब्यू, क्रिकेटर पिता का बेटा अब संवार रहा टीम इंडिया

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पाकिस्तान के खिलाफ एक चौके से चमका, अचानक हुआ टेस्ट डेब्यू, क्रिकेटर पिता का बेटा अब संवार रहा टीम इंडिया

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हाइलाइट्स

पाकिस्तान के खिलाफ एक शॉट से चमक गया था ये भारतीय क्रिकेटर
पिता ने भारत के लिए 2 टेस्ट खेले थे, खुद का करियर भी इतने मैच में खत्म

नई दिल्ली. फर्स्ट क्लास करियर में 10 हजार से अधिक रन… 33 शतक..फिर भी 2 टेस्ट में करियर खत्म. यह कहानी है ऋषिकेश कानिटकर की, जो फिलहाल महिला क्रिकेट टीम के कोच की भूमिका निभा रहे हैं. ऋषिकेश कानिटकर ने घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा किया, शतकों की लाइन लगा दी. 2 बार अपनी कप्तानी में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता. लेकिन, आज भी जब कानिटकर का जिक्र होता है तो पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी एक पारी, सबसे पहले याद आती है. कानिटकर की ये पारी तो थी महज 11 रन की. लेकिन, इस पारी की कीमत इतनी ज्यादा है कि आज भी ऋषिकेश कानिटकर की पहचान इसी से है.

ऋषिकेश कानिटकर ने पाकिस्तान के खिलाफ ये पारी 1998 में ढाका में खेले गए इंडिपेंडेंस कप के फाइनल में खेली थी और कानिटकर के चौके के कारण भारत ने ये ट्रॉफी 1 गेंद रहते जीती थी. भारत को इस मैच में 48 ओवर में 315 रन का टारगेट मिला था. आखिरी 2 गेंद में भारत को 3 रन की जरुरत थी. सकलैन मुश्ताक के हाथों में गेंद थी और कानिटकर 7वें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरे थे. जीत मुश्किल दिख रही थी. क्योंकि रोशनी कम होती जा रही थी और फ्लड लाइट्स भी नहीं थी. ऐसे में सकलैन के ओवर की 5वीं गेंद पर कानिटकर ने मिडविकेट की तरफ चौका उड़ाकर भारत को कभी न भूलने वाली जीत दिलाई थी.

इस जीत के बाद वो रातों-रात स्टार बन गए थे. इसके बावजूद उनका टेस्ट करियर 2 मैच में ही खत्म हो गया. हालांकि, उन्होंने 34 वनडे जरूर खेले. इसमें उन्होंने 339 रन बनाए और 17 विकेट हासिल किए थे.

अचानक मिला था टेस्ट डेब्यू का मौका
इंडिपेंडेंस कप के एक चौके से ऋषिकेश कानिटकर की लॉटरी लग गई और उन्हें एक के बाद एक कई वनडे मैच में मौका मिला. लेकिन, टेस्ट डेब्यू का इंतजार बाकी थी. कानिटकर बतौर कप्तान इंडिया-ए टीम के साथ वेस्टइंडीज दौरे पर गए थे. उसी समय भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में खेल रही थी. अजय जडेजा चोटिल हो गए थे. उनके रिप्लेसमेंट के रूप में कानिटकर को बुलावा आया. लेकिन, ऋषिकेश कानिटकर ऑस्ट्रेलिया पिचों के लिहाज से तैयार नहीं थे और दोनों ही टेस्ट में वो फेल रहे. वहीं, वनडे सीरीज में भी नाकाम रहे. उन्होंने साल 2000 के बाद टीम इंडिया की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला.

3 टीम की तरफ से घेरलू क्रिकेट खेले
इसके बाद उन्हें टेस्ट में कभी मौका नहीं मिला. हालांकि, वो अगले एक दशक तक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के लिए क्रिकेट खेलते रहे. राजस्थान ने उनकी कप्तानी में ही लगातार दो बार रणजी ट्रॉफी जीती थी. बाद में उनकी कोचिंग में तमिलनाडु की क्रिकेट टीम भी रणजी ट्रॉफी जीती थी.

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच हैं
ऋषिकेश के पिता हेमंत कानिटकर भी भारत की तरफ से 2 टेस्ट खेले थे. 2015 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया था. इसके बाद वो फुलटाइम कोच बन गए और उन्हें इस साल भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कोच बनाया गया. उनकी कोचिंग में भारतीय महिला क्रिकेट टीम हाल ही में महिला टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंचीं थी.

Tags: Hrishikesh Kanitkar, India Vs Pakistan, Indian Women’s Cricket Team, Women cricket

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