Home Breaking News UN Chief: लैंगिक समानता हासिल करने में लगेंगे 300 साल, क्यों बोले यूएन चीफ, इसके क्या हैं मायने?

UN Chief: लैंगिक समानता हासिल करने में लगेंगे 300 साल, क्यों बोले यूएन चीफ, इसके क्या हैं मायने?

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UN Chief: लैंगिक समानता हासिल करने में लगेंगे 300 साल, क्यों बोले यूएन चीफ, इसके क्या हैं मायने?

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संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस

संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का लैंगिक समानता को लेकर बड़ा बयान आया है। सोमवार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं की स्थिति पर बोलते हुए गुटेरेस ने कहा कि लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति हमारी आंखों के सामने गायब हो रही है। उन्होंने कहा, मौजूदा अनुमानों के अनुसार, लैंगिक समानता हासिल करने में दुनिया को अभी 300 साल लग जाएंगे। 

गुटेरेस ने मातृ मृत्यु दर की उच्च दर का हवाला दिया। कहा कि लड़कियों को कम उम्र में शादी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है और स्कूल जाने से रोकने के लिए उन पर हमला किया जा रहा है। ये इस बात का प्रमाण है कि लैंगिक समानता हासिल करने की उम्मीद अधिक दूर होती जा रही है। अपने भाषण में गुटेरेस ने ईरान का जिक्र नहीं किया, जहां दिसंबर में हिजाब प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एक युवती की हत्या कर दी थी। 

यूएन चीफ ने और क्या-क्या कहा? 

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव गुटेरेस ने विशेष रूप से अफगानिस्तान सहित कुछ देशों का नाम लेते हुए कहा, ‘दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों का दुरुपयोग, धमकी और उल्लंघन किया जा रहा है। महिलाओं और लड़कियों को सार्वजनिक जीवन से मिटाने की कोशिश की जा रही है।’ 

गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महिला के उप महासचिव और कार्यकारी निदेशक ने हाल ही में अफगानिस्तान का दौरा किया और तालिबान अधिकारियों को बताया कि हम महिलाओं और लड़कियों के लिए लड़ना कभी नहीं छोड़ेंगे।

यूएन की हैरान करने वाली रिपोर्ट

हाल ही में यूएन ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 महामारी, हिंसक संघर्ष और जलवायु परिवर्तन समेत सिलसिलेवार वैश्विक संकटों की पृष्ठभूमि में लैंगिक विषमताएं बद से बदतर हो रही हैं। महिलाओं के यौन व प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों पर प्रहार से हालात और चुनौतीपूर्ण हुए हैं। यही कारण है कि देशों के लिए 2030 की समय सीमा के भीतर टिकाऊ विकास के पांचवे लक्ष्य को पूरा कर पाना सम्भव नहीं होगा। 

बिना निवेश किए लैंगिक समानता हासिल करना मुश्किल

यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशिका सीमा बहाउस ने कहा, ‘हम जैसे-जैसे 2030 के आधे रास्ते के करीब पहुंच रहे हैं, यह महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता के लिये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह महत्वपूर्ण है कि हम एकजुट होकर महिलाओं और लड़कियों के लिये प्रगति में तेजी लाने के लिये निवेश करें। आंकड़े उनके जीवन में फिर से आए ढलान को दर्शाते हैं, जिसे वैश्विक संकटों ने बद से बदतर बना दिया है। खासतौर से आय, सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य में। हम इस रुझान को बदलने में जितना अधिक समय लेंगे, हम सभी को इसकी कीमत उतनी ही चुकानी पड़ेगी।’

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