Home Breaking News ‘तू झूठी मैं मक्कार’ देखने के बाद लोग इसका मतलब समझ पाएंगे, शुरू से यही नाम था मेरे पास

‘तू झूठी मैं मक्कार’ देखने के बाद लोग इसका मतलब समझ पाएंगे, शुरू से यही नाम था मेरे पास

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‘तू झूठी मैं मक्कार’ देखने के बाद लोग इसका मतलब समझ पाएंगे, शुरू से यही नाम था मेरे पास

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‘प्यार का पंचनामा’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ जैसी हिट फिल्मों का निर्देशन कर चुके लव रंजन की फिल्म ‘तू झूठी मैं मक्कार’ रंग और गुलाल के साथ साथ मौसम की मस्ती वाले एहसास लेकर सिनेमाघरों तक पहुंच गई है। अब तक कार्तिक आर्यन के साथ काम करते रहे लव ने पहली बार रणबीर कपूर संग टोली बनाई है। मेरठ से निकले मशहूर कॉमेडियन अनुभव सिंह बस्सी भी बड़े परदे तक इस फिल्म के जरिये पहुंच गए हैं। लव रंजन का ज्यादातर वक्त दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बीता है। कहानियां भी वह इसीलिए इसी के आसपास बुनते हैं और नए चेहरों के साथ काम करने में उन्हें आनंद आता है।



लव रंजन कहते हैं, ‘अब तक कम से कम सात आठ न्यूकमर्स के साथ तो काम कर ही चुका हूं। नए लोगों के साथ काम करने से नया उत्साह बनता है और कुछ नया रचने का हौसले को पानी मिलता है।’ लव रंजन की फिल्मों के शीर्षक तुरंत ध्यान खींचते हैं। वह कहते हैं, ‘फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से लेकर ‘सोनू के टीटू की’ स्वीटी तक तो फिल्मों के टाइटल अपने आप ही ध्यान में आते रहते थे। लेकिन इस बार मेरे लिए चुनौती यह थी कि अब इस तरह के टाइटल कहां से लाए, लेकिन ‘तू झूठी मैं मक्कार’ का भी टाइटल अपने आप ही  दिमाग में आ गया। अभी तो लोगों को ‘तू झूठी मैं मक्कार’ एक चालू टाइप का टाइटल लग रहा होगा, लेकिन जब लोग इस फिल्म को देखकर थियेटर से बाहर आएंगे तो लोगों के दिमाग में इस शब्द के मायने बदल जाएंगे और यह टाइटल बहुत प्यारा लगेगा।’

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जब फिल्म का टाइटल तीन साल पहले ही फाइनल हो गया था तो इसे छिपाकर क्यों रखा गया? लव रंजन कहते हैं, ‘फिल्म ‘तू झूठी मैं मक्कार’ का  टाइटल तो मुझे फिल्म बनाने से पहले ही आ गया था। लेकिन, मैं इस बात का मौका अपने पास हमेशा से रखना चाहता हूं कि जब आप को फिल्म बनाते समय यह लगे कि फिल्म का टाइटल यह नहीं बल्कि कुछ और हो सकता है तो आप टाइटल बदल सकते हैं और दूसरी बात, फिल्म की शूटिंग हमने ऐसे समय में शुरू की थी, जब कोविड का दौर था। कोविड के बारे में किसी को पता ही नहीं था कि कितना लंबा चलेगा, अगर उस समय फिल्म का टाइटल अनाउंस कर कर दिए होते तो फिल्म का टाइटल अब तक बासी हो गया होता।’

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रणबीर कपूर और श्रद्धा कपूर के बाद फिल्म में लव ने तीसरे कपूर यानी बोनी कपूर को भी कास्ट कर लिया? यह संयोग कैसे बना? इस सवाल के जवाब में लव रंजन कहते हैं, ‘फिल्म में पिता के रोल के लिए हम एक ऐसे इंसान को ढूंढ रहे थे जो बोनी कपूर जैसा दिखता हो, इस किरदार के लिए काफी समय तक कास्टिंग चलती रही और मैं अपने कास्टिंग डायरेक्टर को बार बार यह बोल रहा था कि मुझे बोनी कपूर जैसा दिखने वाला एक्टर चाहिए। जब उनके जैसा कोई एक्टर नहीं मिला तो, एक बार दिमाग में ख्याल आया कि क्यों ना बोनी कपूर को ही फिल्म में कास्ट कर लेते हैं।’

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लव रंजन कहते हैं, ‘बोनी कपूर जी जब इस बारे में मेरी बात हुई तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन दिनों वह खुद ही फिल्में प्रोड्यूस कर रहे थे और बहुत बिजी थे। फिर मैंने कहा, एक बार सोचिए इस बारे में, लेकिन वह पहली बार में ही मना कर चुके थे। मैंने उनके बेटे अर्जुन कपूर को फोन करके गुजारिश की कि अगर बोनी जी तुमसे राय मशविरा करें तो, उनको एक्टिंग के लिए प्रेरित करना, बाप बेटे की कुछ बात हुई होगी और दो दिन के बाद बोनी जी हमारे फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए।’

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