Home Breaking News रिश्तों में जमी बर्फ पिघली: वर्षों बाद ईरान और सऊदी अरब कूटनीतिक रिश्तों को शुरू करने पर सहमत, दूतावास खोलेंगे

रिश्तों में जमी बर्फ पिघली: वर्षों बाद ईरान और सऊदी अरब कूटनीतिक रिश्तों को शुरू करने पर सहमत, दूतावास खोलेंगे

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रिश्तों में जमी बर्फ पिघली: वर्षों बाद ईरान और सऊदी अरब कूटनीतिक रिश्तों को शुरू करने पर सहमत, दूतावास खोलेंगे

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Saudi Arab, Iran

Saudi Arab, Iran
– फोटो : सोशल मीडिया

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सऊदी अरब और ईरान के राजनयिक संबंध जल्द पटरी पर लौट सकते हैं। दरअसल, दोनों देश कूटनीतिक संबंधों को फिर से शुरू करने और दूतावासों को खोलने पर सहमत हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने बीजिंग में बैठकर शांति वार्ता की, जिसके बाद इस समझौते का ऐलान किया।

ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए ने भी कहा, ईरान और सऊदी अरब के अधिकारियों के बीच बीजिंग में वार्ता हुई, जिसके बाद वे राजनयिक संबंधों को फिर से स्थापित करने और दूतावासों को खोलने पर सहमत हुए हैं।

चीन, सऊदी अरब और ईरान द्वारा जारी एक संयुक्त त्रिपक्षीय बयान में कहा गया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहल पर सऊदी अरब और ईरान के बीच अच्छे संबंधों को लेकर यह डेवलपमेंट सामने आया है। 

सऊदी अरब सरकार की ओर से जारी बयान में जानकारी दी गई, तीनों देशों ने ऐलान किया है कि सऊदी और अरब और ईरान के बीच एक समझौता हुआ है, जिसमें उनके बीच राजनयिक संबंधों को फिर से बहाल करने और दो महीने की अवधि के  भीतर अपने दूतावासों और मिशनों को फिर से खोलने पर समझौता शामिल है। समझौते में राज्यों (देशों) की संप्रभुता के लिए सम्मान और राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की बात भी शामिल है। 

त्रिपक्षीय समझौते के तहत चीन, सऊदी अरब, और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करेगा और इसके आधार पर बातचीत और कूटनीति के माध्यम से उनके बीच असहमति को हल करने की उनकी साझा इच्छा से आगे बढ़ेगा।

बयान में कहा गया है कि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और इस्लामी सहयोग संगठन के चार्टर्स और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों व मानदंडों के सिद्धांतों, उद्देश्यों का पालन करने पर सहमत हुए। सऊदी अरब और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बीजिंग में 6 से 10 मार्च 2023 तक वार्ता हुई। इसमें सऊदी अरब के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्य मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ मुसाद बिन मोहम्मद अल-ऐबान शामिल हुए, जबकि ईरान के प्रतिधिनिमंडल का नेतृत्व सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी ने किया। 

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बता दें कि ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से एक दूसरे के विरोधी रहे हैं। हाल के वर्षों में हालात और गंभीर हो गए थे। दोनों देश क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए वर्षों से लड़ रहे हैं। इस विवाद के पीछे का कारण धार्मिक मतभेद है। दोनों इस्लाम के अलग-अलग पंथ को मानते हैं। ईरान में ज्यादातर शिया मुसलमान हैं। जबकि सऊदी अरब खुद को एक सुन्नी मुस्लिम राष्ट्र के रूप में देखता है। 

दोनों देशों के बीच साल 2016 से दोनों देशों के बीच रिश्तों में बर्फ जमी थी। इस साल सऊदी अरब के दूतावास पर हमला हुआ था। तब से ईरान और सऊदी अरब के बीच औपचारिक संबंध नहीं हैं। 

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