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भारत में 70 साल बाद चीतों को बसाने के प्रोजेक्ट चीता के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर आठ चीतों को रिलीज किया था। इन चीतों को पहले तो एक से डेढ़ महीने तक छोटे क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया। वहां उन्हें भैंसे का मीट खिलाया गया। फिर एक-एक कर इन चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया, जहां उनके खाने के लिए चीतल जैसे जानवरों को छोड़ा गया था। अब इनमें से दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ दिया गया है। इन्हें रेडियो कॉलर लगाया हुआ है और विशेषज्ञों की टीम इनकी हर हरकत पर नजर रखेगी। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है जब चीतों का सामना अपने से बड़े तेंदुओं या शेर से होगा, तब उनकी प्रतिक्रिया क्या रहती है।
चीतों को देखने का इंतजार खत्म
चीतों के आने के बाद से ही पर्यटक चीतों का दीदार करने का इंतजार कर रहे थे। अब यह इंतजार खत्म हो गया है। पीसीसीएफ जेएस चौहान ने नर चीता ओवान और मादा चीता आशा को खुले जंगल में छोड़ा। इन चीतों के व्यवहार की निगरानी के बाद ही अन्य चीतों को जंगल में छोड़ने पर विचार किया जाएगा।
चीते पूरी तरह से स्वस्थ हैं
सितंबर से अब तक नामीबिया से आए आठ चीते माहौल में अच्छे से घुल-मिल गए हैं। एक मादा चीता को जरूर किडनी में इंफेक्शन हुआ था। अब बताया जा रहा है कि वह ठीक है। आशा के बारे में तो यह खबरें भी आई थी कि वह प्रेग्नेंट है। हालांकि, कुछ समय बाद यह साफ हो गया कि उसका एबॉर्शन हो चुका है। जिन दो चीतों को फिलहाल छोड़ा गया है, उनके व्यवहार के आधार पर तय होगा कि बाकी छह चीतों को बड़े जंगल में कब छोड़ा जाता है। पिछले महीने ही दक्षिण अफ्रीका से भी 12 चीते आए हैं। इन्हें मिलाकर कूनो नेशनल पार्क में ्अब 20 चीते हो गए हैं।
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