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प्रदर्शनी देखते भैयाजी जोशी व अन्य…
– फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से पहले शनिवार को अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक हुई। इसमें समाज परिवर्तन, सेवा कार्यों, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और अमृतकाल के तहत देशभर में किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। अब इन मुद्दों पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में रविवार से मंथन होगा।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में जनसंख्या नियंत्रण पर भी प्रस्ताव रखा गया। इन सभी प्रस्तावों में से अनुमोदित विषयों पर ही आरएसएस प्रतिनिधि सभा की तीन दिनी बैठक में चर्चा की जाएगी। 12 मार्च से शुरू होने वाली तीन दिनी बैठक में मुख्य रूप से विचार-विमर्श इस बात पर केंद्रित होगा कि देश में सामाजिक सद्भाव का माहौल कैसे बनाया जाए, लोगों को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में हुई अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक की अध्यक्षता सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने की। इसके बाद समाज और संघ से जुड़े विषयों को लाया गया। संबंधित लोगों ने विषयों पर विस्तार से बात रखी। बताया जा रहा है कि बैठक में जनसंख्या नियंत्रण विषय संबंधी प्रस्ताव लाने पर भी चर्चा हुई, मगर सभा के किसी भी प्रतिनिधि ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
मंडल की बैठक में समाज को स्वावलंबी बनाने, सेवा कार्यों का विस्तार, सामाजिक समरसता, अमृतकाल के तहत देशभर में किए जाने वाले कार्यों पर चर्चा की। इसके साथ महर्षि दयानंद के जन्म के 200 वर्ष और भगवान महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण वर्ष पर विशेष वक्तव्य जारी किया गया।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक रविवार से शुरू होगी। इसमें संघ और इसके संगठनों के 1400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष भी बैठक में शामिल होंगे। प्रतिनिधि सभा का शुभारंभ सरसंघचालक मोहन भागवत व सरकार्यवाह दत्तात्रेय हौसबले करेंगे।
इसमें सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, विविध संगठनों के पदाधिकारी, सभी क्षेत्र व प्रांतों के संघचालक व कार्यवाह सहित 34 संगठनों के कार्यकर्ता शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा हर वर्ष वार्षिक बैठक करता है। इस बार हरियाणा में यह बैठक 12 साल बाद हो रही है। इससे पहले 2010 में कुरुक्षेत्र में बैठक हुई थी।
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