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हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है अक्षत जिसका अर्थ है - 1. जिसे क्षत या चोट न लगी हो 2. जिसके टुकड़े न हुए हों; अखंड; पूरा 3.कच्चा चावल (जो देवताओं पर चढ़ाया जाता है)। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
यह व्यथा की बात कोई कहे या न कहे।
सपने अपने झर जाने दे, झुलसाती लू को आने दो
पर उस अक्षोभ्य तक केवल मलय समीर बहे।
यह विदा का गीत कोई सुने या न सुने।
मेरा पथ अगर अँधेरा हो, अनुभव का कटु फल मेरा हो
वह अक्षत केवल स्मृति के फूल चुने!
2 hours ago
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