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नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है. इसमें एक बल्लेबाज के धैर्य की परीक्षा होती है, एक गेंदबाज की निरंतरता और विविधता की परीक्षा होती है और इन सबसे ऊपर लगातार पांच दिन खेलने के लिए खिलाड़ियों की फिटनेस भी मायने रखता है. आमतौर पर एक टीम तीन-चार मुख्य गेंदबाजों और कुछ पार्ट टाइम गेंदबाजों का इस्तेमाल करती है ताकि विपक्षी टीम को आउट किया जा सके. लेकिन क्रिकेट इतिहास में ऐसे चार मौके आए हैं, जहां एक टेस्ट पारी में सभी 11 खिलाड़ी गेंदबाजी करने उतरे हैं. पहला 1884 में ऑस्ट्रेलिया के इंग्लैंड दौरे के तीसरे टेस्ट के दौरान हुआ था. अगला उदाहरण 1980 में फैसलाबाद में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच दूसरे टेस्ट के दौरान हुआ था. तीसरा मौका वह है, जिसमें भारत ने 2002 में वेस्टइंडीज का दौरा किया था. आखिरी बार सभी 11 खिलाड़ियों ने 2005 में दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच चौथे टेस्ट मैच के दौरान गेंदबाजी की थी.
आइए नजर डालते हैं, उस मौके पर जब 2002 में भारत बनाम वेस्टइंडीज मैच हुआ था. इस मैच में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया था. भारत ने सलामी बल्लेबाज शिव सुंदर दास (3) का विकेट जल्दी गंवा दिया, लेकिन वसीम जाफर (86) और राहुल द्रविड़ ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 155 रन की साझेदारी की थी. भले ही सचिन तेंदुलकर पहली गेंद पर आउट हो गए थे, लेकिन द्रविड़ के साथ सौरव गांगुली ने सुनिश्चित किया कि भारत उस दिन और विकेट नहीं गंवाए.
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दूसरे दिन की शुरुआत भारत के सौरव गांगुली (45), राहुल द्रविड़ (91) और अनिल कुंबले (6) के जल्दी-जल्दी आउट होने के साथ हुई, लेकिन विकेटकीपर अजय रात्रा और वीवीएस लक्ष्मण ने 8वें विकेट के लिए 205 रनों की नाबाद साझेदारी की, जिसने ड्राइविंग सीट पर भारत के साथ दिन का अंत किया. भारत ने अगले दिन पहले वीवीएस लक्ष्मण (130) का विकेट गंवाया, लेकिन अजय रात्रा (115) ने अपना शतक पूरा किया और पुछल्ले बल्लेबाजों की मदद से 40 और रन जोड़े. इसके बाद गांगुली ने 9 विकेट के नुकसान पर 513 रन के साथ पारी घोषित करने का फैसला किया.
क्रिस गेल और वेवेल हिंड्स ने धीमी शुरुआत की, क्योंकि उन्हें पता था कि गेंदबाजों के लिए पिच में कुछ भी नहीं है. ढाई दिन की भारतीय बल्लेबाजी ने उन्हें यह सीख दे दी थी कि क्रीज पर सब्र से टिके रहो तो रनों का ढेर लगाना मुश्किल नहीं होगा. जहीर खान ने क्रिस गेल (32) को वापस भेजकर पहला ब्रेकथ्रू दिलाया. जब रामनरेश सरवन और वेवेल हिंड्स के बीच साझेदारी का खतरा बढ़ने लगा, तब सचिन तेंदुलकर ने सफलता दिलाई. उन्होंने अच्छी तरह से सेट वेवेल हिंड्स को 65 रन पर पवेलियन की राह दिखा दी. ब्रायन लारा 4 रन ही बना पाए थे और उन्हें अनिल कुंबले ने वापस भेज दिया, लेकिन रामनरेश सरवन के साथ कार्ल हूपर ने बिना किसी और विकेट के नुकसान के दिन का अंत किया.
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वेस्टइंडीज ने अगले दिन के पहले सत्र में सरवन (51) का विकेट गंवाया. वेस्टइंडीज का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर 196 रन था. मैच का पलड़ा भारत की तरफ दिख रहा था, लेकिन शिवनारायण चंद्रपॉल की एंट्री ने भारतीय उम्मीदों को तोड़ दिया. हूपर और चंद्रपॉल दोनों ने क्रीज पर अपार धैर्य दिखाया. भारतीय गति तिकड़ी – जवागल श्रीनाथ, आशीष नेहरा और जहीर खान ने वह सब कुछ करने की कोशिश की जो वे कर सकते थे, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाज सपाट पिच पर मजबूती से टिके रहे. अंत में यह तेंदुलकर ही थे, जिन्होंने कप्तान कार्ल हूपर (136) को वापस भेजकर भारत को अहम सफलता दिलाई.
हो सकता है कि भारत ने रिडले जैकब्स का शुरुआती विकेट लेने की योजना बनाई हो, जिन्होंने हूपर की जगह ली थी. भारत का शायद प्लान था कि वे वेस्टइंडीज को 460 से नीचे रोक सकें और एक आसान बढ़त ले सकें. लेकिन ऐसा आसान नहीं था, क्योंकि जैकब्स और चंद्रपॉल भारतीय गेंदबाजों पर भारी पड़ते हुए नजर आ रहे थे. कप्तान सौरव गांगुली को गेंदबाजी विकल्प समझ नहीं आ रहे थे और उन्होंने टीम में प्रत्येक खिलाड़ी को गेंद देने का फैसला किया. यहां तक कि विकेटकीपर अजय रात्रा ने भी आकर एक ओवर फेंका. जब अजय रात्रा ने गेंदबाजी की, उस वक्त राहुल द्रविड़ ने विकेटकीपिंग की थी.
सभी अनुभवी और अनुभवहीन गेंदबाजों में से यह ‘द वॉल’ – राहुल द्रविड़ थे, जिन्होंने भारतीय प्रशंसकों के चेहरे पर मुस्कान वापस ला दी. उन्होंने रिडले जैकब्स (118) को पवेलियन वापस भेजा, जो काफी आक्रामक ढंग से बल्लेबाजी कर रहे थे. यह दिन कई शानदार बल्लेबाजों के लिए पहला विकेट लेने वाला दिन था. वसीम जाफर ने मर्विन डिलन और पेड्रो कॉलिन्स के विकेट लिए थे. अगला अवसर वीवीएस लक्ष्मण के लिए अपना पहला विकेट दर्ज करने का था और उन्होंने आखिरी बल्लेबाज कैमरून कफी को वापस भेजा. हालांकि, इस मैच का रिजल्ट ड्रॉ रहा था.
भारतीय खिलाड़ियों के गेंदबाजी आंकड़े:
जवागल श्रीनाथ ने 45 ओवर फेंक कर 82 रन दिए थे. श्रीनाथ को कोई विकेट नहीं मिल पाया था. आशीष नेहरा को भी कोई विकेट नहीं मिला था. उन्होंने 49 ओवर में 122 रन दिए थे. जहीर खान ने 48 ओवर फेंके और 129 रन दिए. इसके साथ ही जहीर के खाते में दो विकेट भी आए. सौरव गांगुली ने 12 ओवर में 44 रन दिए थे. उन्हें भी कोई विकेट नहीं मिला था. सचिन तेंदुलकर के खाते में दो विकेट आए थे. उन्होंने 34 ओवर गेंदबाजी की थी और 107 रन दिए थे.
अनिल कुंबले ने 14 ओवर फेंके और 29 रन दिए थे. कुंबले को एक विकेट मिला था. वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने भी एक-एक विकेट झटका था. वसीम जाफर ने 11 ओवर में 18 रन देकर 2 विकेट झटके थे. एसएस दास और अजय रात्रा ने भी गेंदबाजी की, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल पाया.
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Tags: India vs west indies, Rahul Dravid, Sachin tendulkar, Sourav Ganguly, Vvs laxman
FIRST PUBLISHED : March 14, 2023, 15:21 IST
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