Home Sports  Amazing Video : लड़खड़ाते पैरों से जब दिव्यांग आयुष ने पूरी की दौड़, हार कर भी जीत लिया सबका दिल

 Amazing Video : लड़खड़ाते पैरों से जब दिव्यांग आयुष ने पूरी की दौड़, हार कर भी जीत लिया सबका दिल

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 Amazing Video : लड़खड़ाते पैरों से जब दिव्यांग आयुष ने पूरी की दौड़, हार कर भी जीत लिया सबका दिल

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ग्वालियर. इंसान अगर ठान ले तो बड़ी से बड़ी मुसीबतें  उसे कामयाब होने से नहीं रोक पाती. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ग्वालियर के एक मासूम दिव्यांग आयुष रजक ने. तीसरी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे आयुष ने दिव्यांगों की रेस में भाग लिया और रेस को पूरा करके ही दम लिया. भले ही आयुष इस रेस को हार गया, लेकिन उसने दौड़ पूरी कर यह साबित कर दिया कि हौसलों के आगे बड़ी से बड़ी मुसीबतें भी हार जाती हैं. दिव्यांगों की रेस में आयुष को दौड़ते देख हर किसी की आंखें नम हो गईं. सबने उसके जज्बे को सलाम किया. मुख्य अतिथि ने तो आयुष को माला पहना कर कहा, तुम हार कर भी जीत गए. इस रेस में शामिल होने के लिए आयुष 35 किलोमीटर दूर से अपने पिता की सायकल पर बैठकर आया था.

ग्वालियर के घाटीगांव ब्लॉक के स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए एक रेस का आयोजन किया गया था. बराई गांव के स्कूल में 100 मीटर की दौड़ आयोजित हुई. इस दौड़ में दर्जनों दिव्यांग छात्रों ने शिरकत की. इस रेस में पुरानी छावनी के जिगसौली स्कूल का कक्षा 3 का छात्र आयुष रजक भी दौड़ा. सीटी बजते ही सभी दिव्यांग छात्र तो फर्राटे से दौड़ने लगे. लेकिन आयुष अपने कमज़ोर पैरों के कारण धीरे धीरे दौड़ रहा था. वो सबसे पीछे रह गया. लेकिन ये आयुष का ही जज्बा था कि सबसे पीछे रहने के बावजूद आयुष ने बीच में रेस नहीं छोड़ी बल्कि वह लगातार दौड़ता रहा. आयुष का यह जज्बा देखकर वहां मौजूद लोग भी तालियां बजाकर उसका हौसला बढ़ाते रहे. आखिर में आयुष ने 100 मीटर की रेस पूरी कर ही ली. आयुष रेस  हार गया था लेकिन इस हार में भी उसकी सबसे बड़ी जीत थी.

 आयुष के हौसले से जीता सबका दिल
बराई के सरकारी स्कूल में हुई दिव्यांगों की रेस में वैसे तो दो दर्जन से ज्यादा दिव्यांग छात्रों ने हिस्सा लिया. 100 मीटर की इस रेस को जीतने वाले छात्रों को पुरस्कार भी मिला. लेकिन सबसे बड़ा सम्मान आयुष रजत को मिला. तीसरी क्लास का दिव्यांग छात्र आयुष इस रेस में शुरू से ही सबसे पीछे था लेकिन उसने रेस बीच में छोड़ने की बजाय पूरी करके ही दम लिया. नन्ने नन्ने कदमों से आयुष को दौड़ते देख आसपास मौजूद लोगों ने भी उसका तालियां बजाकर हौसला बढ़ाया. भले ही आयुष इस रेस में सबसे अंतिम पायदान पर आकर रेस हार गया था. लेकिन आयुष ने अपने हौसले से हर किसी का दिल जीत लिया.

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