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RSS: ‘गांवों तक संघ मजबूत, कश्मीर में युवाओं की शाखाओं में भागीदारी आतंक के खात्मे का दे रही संदेश’

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RSS: ‘गांवों तक संघ मजबूत, कश्मीर में युवाओं की शाखाओं में भागीदारी आतंक के खात्मे का दे रही संदेश’

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संघ की बेल शहर ही नहीं गांवों तक फैली है। इसमें सबसे मजबूत केरल में है। देश के अन्य प्रांतों में भी मजबूती के लिए कार्य शुरू किए गए हैं। इनमें प्रभावी परिणाम जम्मू-कश्मीर में दिखाई दे रहे हैं। यहां शाखा संगम और पथसंचलन में युवाओं की भागीदारी आतंक को खत्म करने का संकेत दे रही हैं। हरियाणा में भी संघ शहरों के साथ गांवों और कस्बों में पहले से मजबूत हुआ है। इसका बड़ा उदाहरण नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर एक दिन पराक्रम प्रधान शाखा रही। 10 जिलों के 24 मंडलों के हर ग्राम में शाखा लगी। इन शाखाओं में 20168 स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

संघ की ओर से गुणवत्ता प्रशिक्षण और गुणवत्ता विकास के कार्य 17 प्रांतोंं में किए गए हैं। इसके साथ कार्य विस्तार 20 प्रांतों में किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक प्रतिवेदन-2022-23 में इन सबको स्पष्ट किया गया है। संघ की रिपोर्ट के अनुसार विगत वर्ष संघ के कार्य विस्तार का सफल वर्ष रहा। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने बताया कि महामारी से पूर्व की स्थिति से हम आगे बढ़े हैं।

संकट के असर का सामना कर हम उसे हराने में सक्षम हुए। चुनौतियों में भी काम करने के अनुभवों से हमने कई पाठ सीखे हैं। परिस्थितियों की अनुकूलता का लाभ लेते हुए देश के विभिन्न प्रांतों में कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक तथा सामाजिक दृष्टि से कई प्रकार के सराहनीय प्रयास किए हैं। कार्य विस्तार के साथ गुणात्मक और प्रभावात्मक वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है कि सारा समाज एक है, सब मेरे हैं और मुझे समाज को कुछ देना है, इस मूल मंत्र पर काम किया जा रहा है।

20 प्रांतों में किया गया कार्य विस्तार

संघ ने नूतन वर्ष में 20 प्रांतों में कार्य विस्तार किया। इनमें कर्नाटक दक्षिण, कर्नाटक उत्तर, तेलंगाना, पश्चिम महाराष्ट्र, गुजरात, गुजरात-1, मालवा, छत्तीसगढ़, चित्तौड़, जोधपुर, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर, मेरठ, कानपुर, काशी, झारखंड, ओडिशा पश्चिम, दक्षिण असम में अल्पकालीन विस्तारक पहुंचे। सबसे बड़ी बात जम्मू कश्मीर में 11 सितंबर 2022 को रियासी नगर में शाखा संगम कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में 42 स्थानों से 64 शाखा लगाई गईं। जिले के 39 में से 33 मंडलों व 14 में से 13 बस्तियों का सहभाग रहा।

जम्मू कश्मीर में विद्यार्थी शाखाओं की संख्या 17 से बढ़कर 22 पहुंची

कार्यकर्ता प्रशिक्षण गुणवत्ता विकास के अंतर्गत जम्मू कश्मीर के जम्मू महानगर में 25 सितंबर को बाल पथसंचलन किया, जिसमें 221 बाल स्वयंसेवक शामिल हुए। 18 बाल स्वयंसेवक घोषण पथ में उपस्थित रहे। विद्यार्थी शाखाओं की संख्या 17 से बढ़कर 22 पहुंची। हरियाणा में कार्यकर्ता प्रशिक्षण और गुणवत्ता विकास के अंतर्गत आठ से 15 अगस्त तक पुण्यभूमि भारत दर्शन सप्ताह कार्यक्रम किया गया। 812 शाखाओं में प्रत्येक दिन अलग पाठ्यक्रम बनाकर देश के महत्वपूर्ण स्थलों, नदियों, पर्वत, ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, स्वाधीनता अमृत महोत्सव से संबंधित स्थानों की जानकारी दी गई। 13132 स्वयंसेवक शामिल हुए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिवस पर एक दिन पराक्रम प्रधान शाखा लगाई गई। 10 जिलों के 24 मंडलों के हर ग्राम में शाखा लगी। इन शाखाओं में 20168 स्वयंसेवक उपस्थित रहे। इनमें 2965 प्रौढ़, 11154 तरुण, 5216 बाल व 793 शिशु शामिल रहे।

कार्यकर्ता प्रशिक्षण गुणवत्ता विकास

आंध प्रदेश, सौराष्ट्र, विदर्भ, मध्यभारत, महाकोशल, चित्तोड़, जोधपुर, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेरठ, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी, मध्य बंग, उत्तर असम में कार्यकर्ता प्रशिक्षण एवं गुणवत्ता विकास के कार्य किए गए।

जागरण श्रेणी कार्य

इस वर्ष 38 प्रांतों में शाखाओं ने सेवा सप्ताह मनाया। 8794 शाखाओं में 54678 स्वयंसेवक शामिल हुए। देशभर में किए गए उपक्रमणों की संख्या 46229 है। कुल नियमित सेवा कार्यों की संख्या 72604 मातृ संगठन सेवा भारती है। इसके अलावा धर्म जागरण और गोसेवा के कार्य किए गए। धर्म जागरण समन्वय महाराष्ट्र के जलगांव जिले के जामनेर तहसील के अंतर्गत गोद्री स्थान पर अखिल भारतीय हिंदू गोर बंजारा एवं लबाना लायकडा समा का कुंभ 25 से 30 जनवरी तक किया गया। फिलहाल गोसेवा की गतिविधियां 43 प्रांतों में चलाई जा रही हैं। गांव से लेकर विभाग स्तर तक 35960 कार्यकर्ता हैं।

प्रभावी होती गतिविधियां

ग्राम विकास : इसके लिए 45 में से 42 प्रांतों में संयोजक नियुक्त हैं। क्षेत्र स्तर पर 11 में से पांच संंयोजक हैं। इनकी तीन दिवसीय कार्यशाला झारखंड में की गई है। 15 संकुलों में जागरणात्मक, रचनात्मक और आर्थिक विकास के कार्य चल रहे हैं। 11 संकुलों में कृषि उत्पादक कंपनियों का निर्माण हो चुका है। सामाजिक समरस्ता के अंतर्गत ग्राम सर्वेक्षण, समरसता यात्राएं, स्वच्छ कर्मचारी सम्मान, समरसता सम्मेलन, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।

प्रांतों में विशेष कार्यक्रम

आंध्रप्रदेश, कोकण, पश्चिम महाराष्ट्र, विदर्भ, मध्य भारत, महाकोशल, चित्तौड़, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, दक्षिण बंग, उत्तर बंग, उत्तर बंग-1, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा में विशेष कार्यक्रम किए गए।

अखिल भारतीय बैठक में योजनाएं होती हैं तैयार

सात से नौ जुलाई को राजस्थान के जयपुर प्रांत के झुंझनू स्थित खेती शक्ति परिसर में प्रांत प्रचारकों की बैठक हुई। समन्वय बैठक 10 से 12 सितंबर को रायपुर स्थित जैनम में हुई। इसमें कार्य पद्धति सामाजिक परिवर्तन के प्रयास व उपलब्धियों पर चर्चा की गई। कार्यकारी मंडल बैठक 16 से 19 अक्टूबर को प्रयागराज के गोहनियां स्थित वात्सल्य परिसर में हुई। कार्य स्थिति की समीक्षा, विविध कार्य विभागों का वृत्त और आगामी वर्षों में संगठन की दिशा पर चिंतन किया।

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