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IPS Deputation
– फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
कई वर्षों से केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आने वाले ‘आईपीएस’ अफसरों का तय कोटा भर नहीं पा रहा है। आईपीएस डीजी, एसडीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी के जितने पद स्वीकृत किए गए हैं, उसमें से लगभग पचास फीसदी पद खाली पड़े रहते थे। आईपीएस डीआईजी और एसपी के पदों का तो बुरा हाल था। आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने गत वर्ष प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे, तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। अब केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है, तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति ‘आईपीएस कार्यकाल नीति’ के तहत
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया, संविधान के अनुच्छेद-312 के तहत प्रावधान किया गया है कि आईपीएस, संघ और राज्य, दोनों के लिए एक अखिल भारतीय सेवा है। केंद्र सरकार के विभिन्न पुलिस और अन्य संगठनों/विभागों में एक निश्चित संख्या में पदों को विभिन्न राज्य संवर्गों को आवंटित आईपीएस अधिकारियों द्वारा भरा जाता है। आईपीएस (संवर्ग) नियमावली 1954, के नियम 6 (1) के अंतर्गत आईपीएस अफसरों की केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद गृह मंत्रालय, आईपीएस के लिए संवर्ग नियंत्रण प्राधिकारी होने के नाते, प्रत्येक वर्ष में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए सभी राज्य सरकारों/संवर्गों से उनके लिए निर्धारित केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) कोटा के मुताबिक, अनुरोध करता है।
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