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फाल्के अवॉर्ड लौटाने वाली निकिता का हॉरर हंगामा, लोककथा पर बनी फिल्म में निभाया रहस्यमयी किरदार

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फाल्के अवॉर्ड लौटाने वाली निकिता का हॉरर हंगामा, लोककथा पर बनी फिल्म में निभाया रहस्यमयी किरदार

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सिनेमा के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार की तर्ज पर मुंबई में दिए जाने वाले निजी पुरस्कारों का सबसे पहले विरोध करने वाली अभिनेत्री निकिता घाग की पारलौकिक शक्तियों के विषय पर बनी फिल्म ‘आनंदी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। फिल्म में निकिता ने बंगाल के ग्रामीण अंचलों में प्रचलित लोककथाओं के आधार पर एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो महिलाओं को प्रताड़ित करने वाली पुरुषों पर खास नजर रखती है। एक सुनसान हवेली में रहकर तांत्रिक पूजा करने वाली ये महिला रात के अंधेरे में अबलाओं की रक्षक बनकर घूमती है। बांग्ला फिल्मों के चर्चित निर्देशक पार्थसारथी मन्ना ने ये फिल्म निर्देशित की है।



निकिता घाग फिल्म ‘आनंदी’ की निर्माता भी हैं और इसमें उन्होंने शीर्षक भूमिका भी निभाई है। फिल्म की शूटिंग पूरी होने और इसका पोस्ट प्रोडक्शन भी करीब करीब पूरा हो जाने से उत्साहित निकिता घाग बताती हैं, ‘ये कहानी जब मेरे पास पहली बार आई तो मैं इसके विचार से ही उत्साहित हो गई। भारतीय लोक कथाओं के ऊपर फिल्में या वेब सीरीज बनाने के लिए मुंबई के फिल्म निर्देशक कम ही रुचि दिखाते हैं, इसलिए मुझे इसके लिए एक ऐसे निर्देशक की तलाश थी जो भारतीय किवदंतियों में विश्वास कर सके। मामी फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीत चुके निर्देशक पार्थसारथी से मुलाकात के बाद मुझे यकीन हुआ कि इस लोककथा को परदे पर उतारा जा सकता है।’

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इस फिल्म का फर्स्ट कट देखने के बाद इसमें निकिता घाग का लुक काफी रहस्यमयी नजर आता है। इस बारे में निकिता बताती हैं, ‘फिल्म ‘आनंदी’ में मेरे किरदार के कई आयाम हैं। तंत्र विद्या में महारत रखने वाली ये महिला न सिर्फ दिखने में बेहद खूबसूरत है बल्कि इस किरदार में मेरे सामने अपनी आंखों के जरिये अपने भाव प्रदर्शित करने की चुनौती थी। और, जीवन में चुनौतियों मुझे शुरू से उत्तेजित करती रही हैं। मेरे पास ओटीटी और फिल्मों के तमाम प्रस्ताव रोज आते हैं लेकिन मेरा मानना है कि बजाय विदेशी फिल्मों या सीरीज के हिंदी अनुकूलन बनाने के भारतीय फिल्मकारों को देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित लोक कथाओं पर काम करना चाहिए।’


वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘आनंदी’ भारतीय कथाओं को परदे पर लाने की मेरी पहली कोशिश हैं और मेरा मानना है कि ऐसी और भी कहानियां भारतीय लेखकों के पास हैं, जिन पर काम किया जा सकता है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार के लिए मैं आगे भी तैयार रहूंगी।’ पारलौकिक विषयों को लेकर अपनी खास रुचि के बारे में भी निकिता खुलकर बात करती हैं। वह कहती हैं, ‘भारतीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों में हॉरर पर अब भी बहुत ही कम काम हुआ है। हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों को देखने वालों की बहुत बड़ी तादाद रही है। ये जानकारी ही मन खुश कर देने वाली रही है कि ‘स्पेशल 26’, ‘ए वेडनसडे’ और ‘एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ जैसी कमाल की फिल्में बनाने वाले निर्माता, निर्देशक नीरज पांडे इस दिशा में गंभीरता से काम शुरू कर चुके हैं। दादी और नानी की कहानियों में अधिकतर कहानियां ऐसी ही होती हैं, जिन्हें सुनते हुए डर भी लगता है लेकिन फिर भी उन्हें सुनने का मन करता है।’


पालतू और आवारा पशुओं की देखभाल करने वाली और सड़क पर मिले घायल पशुओं का इलाज कराने वाली संस्था दावा इंडिया की संस्थापक निकिता घाग अंतर्राष्ट्रीय फैशन मॉडल हैं और दुनिया के तमाम मशहूर ब्यूटी प्रोडक्ट्स की वह अंबेसडर रह चुकी हैं। मुंबई में बंटने वाले दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवार्ड्स को लेकर बीते दिनों मचे हंगामे के दौरान उन्होंने अपना ऐसा ही एक अवार्ड ये कहकर लौटा दिया था कि सिनेमा के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार में बारे में नई पीढ़ी के कलाकारों को ज्यादा जानकारी न होने का फायदा मुंबई के कुछ आयोजक उठाते रहे हैं और इस तरह की गलत परंपराओं पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।


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