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सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह इस बात पर विचार करेगा कि क्या पार्टियों के राजनीतिक चंदे के लिए चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को ‘आधिकारिक घोषणा’ के लिए संवैधानिक पीठ के पास भेजा जा सकता है।
याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है या नहीं, यह तय करने के लिए शीर्ष अदालत की उक्त टिप्पणियां इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर करने वाले एक एनजीओ के दावे को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि अब तक राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 12,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और इसमें से दो तिहाई राशि एक ही प्रमुख राजनीतिक दल को गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मामले में तेजी से फैसला करने की आवश्यकता है।
11 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, ”हम देखेंगे कि क्या याचिकाओं को 11 अप्रैल को संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है।” जनहित याचिका दायर करने वालों में से एक की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना का लोकतांत्रिक राजनीति और राजनीतिक दलों के वित्त पोषण पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।
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