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NATO Vs China-Russia: नाटो के एशिया में विस्तार के खिलाफ एकसाथ आए रूस-चीन, अमेरिका ने कही ये बड़ी बात

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NATO Vs China-Russia: नाटो के एशिया में विस्तार के खिलाफ एकसाथ आए रूस-चीन, अमेरिका ने कही ये बड़ी बात

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पुतिन, शी जिनपिंग और जो बाइडेन

पुतिन, शी जिनपिंग और जो बाइडेन
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों रूस के दौरे पर हैं। यहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों के नए युग की शुरुआत की बात कही। इसके अलावा पश्चिमी देशों द्वारा उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के एशिया में किये जा रहे विस्तार पर भी दोनों देशों ने चर्चा की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसको लेकर दोनों नेताओं ने चिंता व्यक्त की और कहा कि इसके जरिए अमेरिका अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों ने नाटो के एशिया में विस्तार के खिलाफ एकसाथ आने पर सहमति भी बनाई।  

जिनपिंग के शांति प्रस्ताव को मानने से इनकार 

बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन के सामने एक शांति प्रस्ताव भी रखा। जिसे पुतिन ने मानने से इनकार कर दिया। हालांकि कहा जा रहा है कि ये शांति प्रस्ताव केवल दिखावे के लिए था। चीन रूस के साथ हर तरह से खड़ा है और ये दौरा भी दुनिया को दिखाने के लिए ही है। चीन इसके जरिए रूस को एक तरह से समर्थन दे रहा है। 

चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन पर बातचीत के लिए तैयार हैं। पुतिन ने युद्ध को लेकर चीन की ओर से दिए गए 12-सूत्रीय शांति प्रस्ताव की प्रशंसा भी की। पुतिन ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद कहा, ‘चीन द्वारा पेश की गई शांति योजना के कई प्रावधानों को शांतिपूर्ण समाधान के आधार के रूप में लिया जा सकता है। लेकिन ये तभी हो सकता है जब यूक्रेन और उसका साथ देने वाले बाकी पश्चिमी देश इसके लिए तैयार होंगे। हालांकि अभी तक हमने उनकी ओर से ऐसी तत्परता नहीं देखी है।’

यूक्रेन ने भी जिनपिंग को आमंत्रित किया

दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। एक बयान जारी कर जेलेंस्की ने कहा कि कीव ने चीन को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है और वह बीजिंग से जवाब का इंतजार कर रहा है। जेलेंस्की ने कहा, ‘हमने चीन को शांति सूत्र के कार्यान्वयन में भागीदार बनने की पेशकश की। हमने अपने सूत्र को सभी चैनलों पर पारित किया। हम आपको बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं। हम आपके जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’

हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा कि वह चीन को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में सक्षम नहीं देखता है। संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों में एक बिचौलिया बनने के बीजिंग के उद्देश्य की वाशिंगटन आलोचना की।

अमेरिका पर भड़के चीन और रूस

पुतिन और शी जिनपिंग ने बातचीत के बाद अमेरिका पर जमकर भड़ास निकाली। एक संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर वैश्विक सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए पश्चिमी देशों को निशाने पर लिया। रूस और चीन ने घोषणा में कहा, ‘पार्टियां संयुक्त राज्य अमेरिका से अपने एकतरफा सैन्य लाभ को सुरक्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को कम करने से रोकने का आह्वान करती हैं।’

उन्होंने एशिया में नाटो की बढ़ती उपस्थिति पर भी “गंभीर चिंता” व्यक्त की। शी और पुतिन ने साढ़े चार घंटे बातचीत की और एक-दूसरे को “प्रिय मित्र” कहा। चीन और रूस ने अक्सर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिम का मुकाबला करने के लिए स्थायी परिषद सदस्यों के रूप में अपनी वीटो शक्ति का उपयोग करते हुए लॉकस्टेप में काम किया है।

यूक्रेन पहुंचे जापान के प्रधानमंत्री 

एक तरफ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस की यात्रा पर हैं तो दूसरी तरफ जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भारत से सीधे यूक्रेन पहुंच गए। यहां उन्होंने बुचा शहर का दौरा किया, जहां रूसी सेना पर पिछले साल लोगों के साथ काफी अत्याचार किया था। जेलेंस्की ने अपने शाम के संबोधन में कहा, ‘किशिदा के साथ हमारी बातचीत काफी उत्पादक रही।’

उन्होंने कहा, ‘मैंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए दुनिया को और अधिक सक्रिय रूप से संगठित करने, आक्रामकता से बचाने, रूसी आतंक से बचाने के लिए हमारे साथ मिलकर काम करने के लिए जापान की एक बहुत ही ठोस इच्छा के बारे में सुना।’

किशिदा की ये जापान यात्रा काफी महत्व रखती है, क्योंकि जापान इस साल मई में जी-7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। जेलेंस्की ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की कि वह वीडियो लिंक के माध्यम से जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। वहीं, दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंगलवार को कहा कि वह यूक्रेन के साथ लगभग 15.6 बिलियन डॉलर के चार साल के ऋण पैकेज पर एक समझौते पर पहुंच गया है।

अमेरिका ने क्या कहा?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रूस दौरे को लेकर अमेरिका का बयान भी सामने आया है। व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ये मुलाकात दुनिया में अमेरिकी और नाटो के प्रभाव के प्रतिकार के रूप में वह देखते हैं। किर्बी ने कहा, ‘आपने वर्षों से देखा है कि ये दोनों देश (चीन और रूस) एक साथ बढ़ रहे हैं। मैं इसे गठबंधन कहने के लिए इतनी दूर नहीं जाऊंगा। … (यह) सुविधा का मेल है, क्योंकि मुझे लगता है कि यह यही है। 

 

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