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पंजाब पुलिस छह दिन से खालिस्तान समर्थक, अमृतपाल सिंह को तलाश रही है। वह पुलिस के बहुत करीब से निकल जाता है, मगर 80 हजार पुलिसकर्मियों को उसका सुराग नहीं लगता। उसे लेकर रोज नई सीसीटीवी फुटेज सामने आ रही हैं, मगर अमृतपाल का कोई पता नहीं। इंटेलिजेंस एजेंसी की एक रिपोर्ट में अमृतपाल सिंह को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में वह सारी कहानी है कि कई चेहरे और चरित्र वाला गैर-अमृतधारी सिख, आखिर खालिस्तान समर्थक कैसे बन गया। वेश्यावृत्ति, लैविश लाइफ स्टाइल और नशे की दुनिया में कदम रख चुका ये शख्स किस तरह नशे के सौदागर से गिफ्ट में मिली एक मर्सिडीज में सवार हो, खुद को जरनैल सिंह भिंडरांवाला 2.0 समझ बैठा। उसने पंजाब में धर्म को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया। सच्चाई तो यह थी कि वह दूसरे लोगों के हाथ में खेल रहा था। इसी वजह से उसने ईसा मसीह को नीचा दिखाने की कोशिश की तो वहीं अमृतपाल ने हिंदू धर्म के खिलाफ भी आग उगलनी शुरु कर दी।
मकसद, ‘पैसा और पावर’ कैसे हासिल की जाए
खुफिया एजेंसी की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतपाल सिंह का अतीत खालिस्तान से जुड़ा नहीं रहा है। वह भले ही सिख था, लेकिन उसे खालसा पंत के सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं रहा। तब वह अपने जीवन को एक ऐसा अंदाज में जी रहा था कि जैसे उसके लिए पंजाब और सिख धर्म, कोई मायने ही नहीं रखता। वह देश विरोधी ताकतों के हाथ में खेल रहा था। अगर उसने ‘वारिस पंजाब दे’ की कमान संभाली तो उसके पीछे भी बाहरी ताकतों का हाथ रहा है। पंजाब पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियों ने, इस बाबत ‘आईएसआई’ की सक्रिय भूमिका होने से इनकार नहीं किया है। अमृतपाल और उसे निर्देश देने वाले लोगों का एक ही मकसद था कि जल्द से जल्द ‘पैसा और पावर’ कैसे हासिल की जाए। अमृतपाल ने मिशनरियों के क्राउड फंडिंग पर आवाज उठानी शुरु कर दी। इसके पीछे उसका मकसद यह दिखाना था कि वह सिख धर्म का एक बड़ा रक्षक है। इसके लिए उसने ईसा मसीह तक को नीचा दिखाने का प्रयास किया। अमृतपाल के मन में कट्टरता का समावेश था, इसीलिए उसने हिंदू धर्म को भी टारगेट करना शुरु कर दिया। पंजाब में उसने हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण दे डाले। अमृतसर में दिन दहाड़े हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की हत्या कर दी गई। हत्यारोपी संदीप सिंह उर्फ सनी, अमृतपाल का ही सहयोगी था। संदीप की कार पर ‘वारिस पंजाब दे’ का स्टीकर लगा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, सूरी की हत्या के लिए संदीप को अमृतपाल ने ही उकसाया था।
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