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Defence: T-72 और T-90 टैंक का इंजन कितना हुआ स्वदेशी, क्यों दांव पर है आयुद्ध कारखानों से बने निगमों का भाग्य

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Defence: T-72 और T-90 टैंक का इंजन कितना हुआ स्वदेशी, क्यों दांव पर है आयुद्ध कारखानों से बने निगमों का भाग्य

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टी-90 टैंक

टी-90 टैंक
– फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

रक्षा पर 38वीं स्थायी समिति की रिपोर्ट (2022-2023) अब सार्वजनिक पटल पर है। साल 2021 में 220 साल पुराने 41 आयुद्ध कारखानों को जिन सात निगमों में तब्दील किया गया था, अब उनकी स्थिति कैसी है, रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है। हालांकि सरकार की ओर से रिपोर्ट में सात निगमों को लेकर गुलाबी तस्वीर दिखाने का हर संभव प्रयास किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘टी-72’ और ‘टी-90’ टैंक में जो इंजन लगते हैं, वे पूरी तरह से स्वदेशी हैं। अगर संपूर्ण टैंक की बात करें तो ‘टी-72’ अब 96 फीसदी स्वदेशी हो गया है। इसी तरह ‘टी-90’ टैंक का भी स्वदेशी स्तर करीब 82 फीसदी तक पहुंच चुका है। दूसरी ओर, एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में सात निगमों का भाग्य दांव पर लगने वाला है। निगमों की ऑर्डर बुक की स्थिति पर गौर करें तो अगले पांच वर्षों के लिए वह तस्वीर बहुत ही धूमिल है।

रिपोर्ट में 95 फीसदी स्वदेशी कंटेंट की बात

रिपोर्ट में एमआईएल को लेकर कहा गया है कि हम लोग आत्मनिर्भर भारत को आत्मसात करते हुए स्वदेशीकरण पर बहुत फोकस करते हैं। इस समय हम जो प्रोडेक्ट बना रहे हैं, उसमें स्वदेशी कंटेंट 95 फीसदी है। केवल पांच फीसदी कंटेंट ही ऐसा है, जिसमें हमें बाहर से लेना पड़ता है। दूसरे निगम एवीएनएल को लेकर कहा गया है कि कुछ प्रोडेक्ट तो सौ फीसदी स्वदेशी हैं। जैसे सीआरएन-91 नेवल गन, कवच, नेवल डेक्वॉय सिस्टम, कुछ माइन प्रोटेक्टिेड व्हीकल और लॉजिस्टिक व्हीकल हैं, जो पूरी तरह स्वदेशी हैं। जितने भी इंजन टी-72 और टी-90 टैंक में लगते हैं, वे पूरी तरह से स्वदेशी हैं। टी-72 टैंक 96 फीसदी और टी-90 टैंक 82 फीसदी स्वदेशी हो चुका है। बीएमपी जो एक आईसीबी व्हीकल है, वह 98 फीसदी है। इसके इंजन का स्वदेशी स्तर 90 फीसदी है। बाकी दोनों इंजन पहले से ही सौ फीसदी स्वदेशी हैं। स्वदेशी आइटमों की संख्या 31 रखी गई है। इनमें से आठ आइटम तो स्वदेशी हो गए हैं। इससे सरकार को 112 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

तीसरे निगम को लेकर 94 फीसदी पर है ग्राफ

एडब्लूईआईएल को लेकर रिपोर्ट में जो तथ्य हैं, उनमें स्वदेशीकरण का प्रतिशत 94 बताया गया है। इसमें आरएंडडी पर फोकस किया गया है। घरेलू एवं वैश्विक जरुरतों के मुताबिक, विभिन्न प्रोडेक्ट की पहचान की गई है। इन सभी का इंटरनल ट्रायल पूरा हो चुका है। इन्हें लांच करने की तैयारी है। देश का पहला स्वदेशी आइटम आर्टिलरी गन ‘धनुष’ रहा है। ये अब भारतीय सेना में तैनात हो चुकी है। ईशापुर की राइफल फैक्ट्री को गत वर्ष इनोवेशन प्रोडेक्ट की श्रेणी में गोल्ड अवॉर्ड मिला था। चौथे निगम ‘आईओएल’ में बैटल टैंक के साइट सिस्टम के 8-10 स्वदेशीकरण हो चुके हैं। छह माह के अंदर ड्राइव नाइट साइट विकसित की गई है।



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