Home Sports Success Story: दोनों पैर नहीं फिर भी भरी ऊंची उड़ान, तानों को बनाया ताकत, पढ़ें अबू हुबैदा की कहानी

Success Story: दोनों पैर नहीं फिर भी भरी ऊंची उड़ान, तानों को बनाया ताकत, पढ़ें अबू हुबैदा की कहानी

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Success Story: दोनों पैर नहीं फिर भी भरी ऊंची उड़ान, तानों को बनाया ताकत, पढ़ें अबू हुबैदा की कहानी

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लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ के रहने वाले अबू हुबैदा की कहानी हर किसी को प्रेरणा दे रही है. दरअसल उन्‍होंने दो साल की उम्र में पोलियो हो जाने की वजह से दोनों पैर हमेशा के लिए गंवा दिए थे. वहीं, रिश्तेदारों ने ताना मारा कि ‘सोने जैसा बच्चा माटी हो गया. अब यह जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा. इन सबके बावजूद अबू हुबैदा ने हार नहीं मानी और पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी बनकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया. गोल्ड समेत कई मेडल अपने नाम किए. यही नहीं, उत्तर प्रदेश का सबसे सर्वोच्च पुरस्कार लक्ष्मण भी अपने नाम किया.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2021 में अबू हुबैदा को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए लक्ष्मण पुरस्कार प्रदान किया था. मोहान रोड स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय में चल रही 5वीं राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप 2023 में भाग लेने पहुंचे अबू हुबैदा ने न्यूज़ 18 लोकल को खास बातचीत में बताया कि द्रोणाचार्य सम्मान से सम्मानित गौरव खन्ना ने बतौर कोच उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है. आज विश्व रैंकिंग में अबू हुबैदा का छठवां स्थान है. लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम करने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और पूरी तरह से पैरा बैडमिंटन पर फोकस किया. पिता मोहम्मद कमर पीएसी में सिपाही हैं और मां नफीसा बानो ने भी उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया है.

भाई के मेडल देखकर जीतने का उत्साह जागा था
अबू हुबैदा ने बताया कि उनके भाई जब क्रिकेट खेलकर घर आते थे, तो उनके पास कई मेडल होते थे. उनके मेडल को देखकर उत्साह जागा और तय किया कि एक दिन उन्हें भी अपने नाम मेडल दर्ज करने हैं. पहला मेडल 2009 में मिला. वहीं, 2017 में जब अंतरराष्ट्रीय पदक देश के लिए जीता, तो बेहद गर्व महसूस हुआ था.

ओलंपिक में मेडल जीतना है लक्ष्य
28 वर्षीय अबू हुबैदा की दो बेटियां हैं. वह कहते हैं कि उनका लक्ष्य ओलंपिक में पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में जीतकर अपने देश को गोल्ड मेडल लाना है. साथ ही अबू हुबैदा ने बताया कि अगर कोई भी दिव्यांग है और उसको लोग ताना मार रहे हैं, तो उन लोगों को अपना दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त समझें. अगर ऐसे लोग जिंदगी में न हों तो आगे बढ़ने की प्रेरणा नहीं मिलेगी.

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FIRST PUBLISHED : March 24, 2023, 18:04 IST

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