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मोदी सरनेम वाले लोग प्रमुख रूप से गुजरात और कुछ संख्या में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में रहते हैं। गुजरात में बहुत से लोग अपने नाम के आगे ‘मोदी’ लगाते हैं। इस उपनाम का उपयोग हिंदू, मुस्लिम और पारसी करते हैं। वैष्णव (बनिया), खरवास (पोरबंदर के मछुआरे) और लोहाना (व्यापारियों का एक समुदाय) सुमदाय में मोदी उपनाम वाले लोग मिलते हैं। इनमें से सभी पिछड़ी जाति में नहीं आते।
पारसी, वैष्णव, लोहाना आदि समुदाय के लोग मोदी सरनेम का इस्तेमाल करते हैं लेकिन, ये पिछड़े वर्ग में नहीं आते। इस उपनाम का उपयोग अग्रवाल समुदाय से आने वाले मारवाड़ी भी करते हैं। इन्हें हरियाणा के हिसार में अग्रोहा कहा जाता है। बाद में ये लोग हरियाणा के महेंद्रगढ़ और राजस्थान के झुंझुनू और सीकर जैसे जिलों में फैल गए।
वहीं, मोदी उपनाम का इस्तेमाल करने वाली कई उप-जातियां ऐसी भी हैं जो पिछड़े वर्ग में आती हैं। दरअसल, नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लिए ओबीसी की केंद्रीय सूची में ‘मोदी नाम से कोई समुदाय या जाति नहीं है। वहीं, गुजरात के ओबीसी के 104 समुदायों की केंद्रीय सूची में ‘घांची (मुस्लिम), तेली, मोध घांची(इसी समुदाय से प्रधानमंत्री मोदी आते हैं), तेली-साहू, तेली-राठौड़, तेली-राठौर को शामिल किया गया है। इनमें से कुछ समुदाय के लोग उपनाम मोदी का इस्तेमाल करते हैं। ये सभी समुदाय परंपरागत रूप से तेल निकालने और व्यापार से जुड़े होते हैं। इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहने वाले इन समुदायों के लोग आमतौर पर उपनाम गुप्ता और मोदी का भी उपयोग करते हैं।
ओबीसी की केंद्रीय सूची में सूचीबद्ध बिहार के 136 समुदायों में, कोई ‘मोदी’ नहीं है। इसी तरह केंद्रीय ओबीसी सूची में राजस्थान के 68 समुदायों की सूची में 51वीं प्रविष्टि के रूप में ‘तेली’ है, लेकिन ‘मोदी’ के रूप में कोई समुदाय सूचीबद्ध नहीं है। यहां भी तेली समुदाय के कुछ लोग मोदी उपनाम का इस्तेमाल करते हैं।
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