Home World IPCC Report: समय रहते नहीं चेते तो 350 करोड़ लोगों की जिंदगी हो जाएगी बर्बाद, UN ने बताया मंडरा रहा है कौन सा खतरा

IPCC Report: समय रहते नहीं चेते तो 350 करोड़ लोगों की जिंदगी हो जाएगी बर्बाद, UN ने बताया मंडरा रहा है कौन सा खतरा

0
IPCC Report: समय रहते नहीं चेते तो 350 करोड़ लोगों की जिंदगी हो जाएगी बर्बाद, UN ने बताया मंडरा रहा है कौन सा खतरा

[ad_1]

पृथ्वी पर खतरा: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के वरिष्ठ अधिकारी ओवेस सरमद (ओवैस सरमा) ने कहा कि 10 दिन पहले क्रीमिया परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल की सिग्नेसी जांच रिपोर्ट (आईपीसीसी) जारी की गई, सभी देशों के लिए आप खोलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण से समझौते के लिए देश जिन अटकलों पर सहमत हैं वे काफी हद तक सहमत नहीं हैं। भारत में पैदा हुए ओवेस सरमदवृष्टि परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारियों के पद पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि दुबई में होने वाली COP की अगली बैठक ‘बेहद महत्वपूर्ण’ होने वाली है और उम्मीद है कि सभी देश इस जगह का उपयोग ‘क्रिया में आवश्यक सुधार’ करने के लिए करेंगे।

केरला के इस फेयरस्टेज गांव में वर्तमान में चल रही जी20 शेरपा मीटिंग से अन्य सरमद ने अपने साक्षात्कार में कहा कि क्र्रीमाइजेशन चेंज (जलवायु परिवर्तन) किसी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है और वे देशों से कर्ज दायित्व को सीमित करने के लिए अपनी भूमिका निभाते हैं का निमन्त्रण किया।

IPCC की चौंकाने वाली रिपोर्ट

आईपीसीसी की 10 मार्च को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 3.3 से 3.6 अरब लोगवृष्टि परिवर्तन से बहुत प्रभावित हो सकते हैं और उनकी बाढ़, सूखा और तूफान से जान जाने की आशंका 15 गुना अधिक है। सरमद ने कहा, ‘आईपीसीसी की वॉयरल रिपोर्ट आंख देखती है। हम इसके बारे में जानते थे कि हम वैश्विक स्थिति के मामले में सही दिशा में नहीं हैं। आईपीसीसी ने ठीक यही संदेश दिया है और उन्हें (राष्ट्रों को) जिनकी जरूरत है वे मूल रूप से बहुत आसान हैं। सरल शब्दों में कहें तो उन्हें सभी क्षेत्रों में दिए गए गैस विशेष होंगे।’

फौरन बड़े कदम उठाने की जरूरत है

यह पूछा जाता है कि कौन से राष्ट्र जिन गठबंधनों पर सहमत हैं, वे चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त हैं? उन्होंने कहा कि वे ‘बिलकुल पर्याप्त नहीं हैं’ और यही बात आईपीसीसी की रिपोर्ट में कही गई है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने कहा कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को सीमित करने के लिए देशों के संबंध पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यूएनएफसी यह सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों के साथ मिल कर काम कर रहा है कि वेव्रीकाइजेशन परिवर्तन के प्रभाव को दूर करें और जर्जर गैसों की सीमाओं को निर्धारित करने के लिए काफी संभावित अवसर लेकर।

दुनिया के कई शहर डूब जाएंगे

भारत जैसे बहुत अधिक आबादी वाले देशों के लिए समुद्री जल स्तर में वृद्धि के खतरे पर गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि इस नुकसान से निपटने के लिए ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जो निचली सड़कों में रहने वाले समुदायों की योजनाएं और दायित्व हैं रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री जल स्तर में 1971 और 2006 के बीच प्रति वर्ष 1.9 अटकाव की तुलना में 2006 और 2018 के बीच 3.7 मोतियाबिंद प्रति वर्ष की वृद्धि हुई। इसके चलते भारत जैसे देशों को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

उसी समय, सरमद ने कहा कि वृक्षारोपण परिवर्तन किसी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं रहेगा और किसी भी अन्य देश की तरह भारत को भी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को जाली दस्तावेजों को सीमित करना, साथ ही उसी समय पूरी जिम्मेदारी और प्रामाणिक तरीके से विकास करने की दिशा में और अधिक अवसरवादी होना चाहिए।

(इनपुट: न्यूज़ एजेंसी भाषा)

हिंदी ख़बरों के लिए भारत की पहली पसंद ZeeHindi.com – सबसे पहले, सबसे आगे

.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here