Home Breaking News Bill Gates On AI: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बन सकता है इंसानों के लिए खतरा? बिल गेट्स ने कही ये बड़ी बात

Bill Gates On AI: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बन सकता है इंसानों के लिए खतरा? बिल गेट्स ने कही ये बड़ी बात

0
Bill Gates On AI: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बन सकता है इंसानों के लिए खतरा? बिल गेट्स ने कही ये बड़ी बात

[ad_1]

Bill Gates On AI And ChatGPT: The Age Of AI Has Begun And Road To Artificial Genral Intelligence

Bill Gates On AI
– फोटो : Amar Ujala

विस्तार

स्टोन, आयरन, ब्रॉन्ज और न्यूक्लियर एज से होते हुए अब हम सिलिकॉन युग में कदम रख चुके हैं। डाटा और कंप्यूटिंग ने नए विश्व की रूपरेखा को गढ़नेे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सूचना क्रांति के इस दौर में इंफोर्मेशन सबसे बड़ी चीज बनकर उभरी है। अब हम एक नए युग में प्रवेश करने जा रहे हैं।

ये युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। एआई आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि से लेकर स्पेस एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में कई नए संभावनाओं को लेकर खड़ा है। इसी पर माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने अपने पर्सनल ब्लॉग गेट्स नोट्स पर विस्तार पूर्ण चर्चा की है। आगे की बात उन्हीं के शब्दों में – 

मैंने अपने जीवन काल में तकनीक के क्षेत्र में दो सबसे बड़ी घटनाएं देखी, जिन्होंने मुझे क्रांतिकारी ढंग से प्रभावित किया। साल 1980 में मैं पहली बार ग्राफिकल यूजर इंटरफेस से रूबरू हुआ, जिसका इस्तेमाल आज विंडोज समेत सभी ऑपरेटिंग सिस्टम में किया जा रहा है। और दूसरी सबसे बड़ी घटना पिछले साल की थी।

मैं 2016 से ओपन एआई की टीम से नियमित तौर पर मिलता रहा हूं। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटलिजेंस के क्षेत्र में उनके काम काफी शानदार थे। मैं उनके काम से काफी खुश और उत्साहित था। पिछले साल 2022 के मध्य में मैंने उन्हें एक खास तरह की चुनौती दी। मैंने उनसे कहा – ” एडवांस्ड प्लेसमेंट बायोलॉजी परीक्षा पास करने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को ट्रेन करें। उसे ऐसे प्रश्नों के जवाब देने में सक्षम बनाएं जिनके लिए उसे विशेष रूप से ट्रेन नहीं किया गया है।” अगर आप ऐसा करते हैं, तो ये आपके लिए काफी बड़ी सफलता होगी।

मुझे लगा कि यह चुनौती इस टीम को दो से तीन सालों के लिए व्यस्त रखेगी। हालांकि, ओपन एआई की टीम ने इस चैलेंज को महज कुछ महीनों में ही पूरा कर लिया। सितंबर, 2022 में मैं जब टीम से दोबारा मिला, तो मैंने देखा कि उनके जीपीटी नामक एआई मॉडल ने एडवांस्ड प्लेसमेंट बायोलॉजी परीक्षा के 60 मल्टीपल चॉयस सवालों के 59 सही जवाब दिए थे। इस तरह के टेस्ट पास करने के बाद हमने जीपीटी एआई मॉडल से विज्ञान से जरा हटके सवाल पूछे जैसे – “तुम एक बीमार बच्चे के पिता से क्या कहोगे?” इस सवाल पर जीपीटी एआई मॉडल ने ऐसा उत्तर दिया, जो कि वहां पर उपस्थित हम सभी लोगों के उत्तरों में सबसे बेहतर था। ये पूरा अनुभव मेरे लिए काफी शानदार था।

मुझे पता था कि ग्राफिकल यूजर इंटरफेस आने के बाद तकनीक के क्षेत्र में ये दूसरी सबसे बड़ी क्रांति है। इसने मुझे उन सभी चीजों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया, जो कि एआई अगले 5 से 10 सालों में करने वाला है? 

आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे काम करने के तरीकों, यात्रा, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर बातचीत करने के ढंग को पूरी तरह से बदल के रख देगा। समूचे उद्योग इसी के इर्द-गिर्द घूमेंगे। एआई दुनिया में व्याप्त असमानताओं को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में असमानताओं को करेगा दूर 

इस समय स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे ज्यादा असमानता है। हर साल 5 साल से कम उम्र में मरने वाले बच्चों की संख्या 5 मिलियन है। इनमें से ज्यादातर बच्चे गरीब देशों में पैदा होते हैं, जो कि डायरिया या मलेरिया रोग के कारण मरते हैं। गौर करने वाली बात है कि इन बीमारियों का आसानी से इलाज किया जा सकता है। हालांकि, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की गैर-मौजूदगी में ऐसा हो नहीं पाता। इस क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करके दुनिया भर में लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

गरीब देशों में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं हैं। स्थिति ऐसी है कि यहां पर रह रहे लोगों को डॉक्टरों से मिलने का मौका तक नहीं मिलता। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को ज्यादा प्रोडक्टिव बनाने के लिए एआई को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। किसी प्रकार की बीमारी होने पर उससे कैसे निपटा जा सकता है? एआई मॉडल इस बारे में अच्छी सलाह दे सकते हैं।

इसके अलावा व्यक्ति के बीमार होने पर वह यह भी बताएगा कि उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट लेने की जरूरत है या नहीं। इससे लोगों को बीमारी के समय निर्णय लेने में काफी मदद मिलेगी। एआई मॉडलों को गरीब देशों में अमीर देशों की तुलना में अलग ढंग से ट्रेन्ड (प्रशिक्षित) किए जाने की जरूरत होगी। गरीब देशों में इन्हें अलग-अलग भाषाओं, बीमारियों और चुनौतियों के साथ काम करना सीखाना होगा। 

बायोलॉजी के क्षेत्र में डाटा के बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रशिक्षित करके नए पैथोजन्स, ड्रग्स, वैक्सीन्स और दवाओं की खोज की जा सकती है।  

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मेडिकल और दूसरे क्षेत्रों में उपयोग में लाने से पहले ध्यानपूर्वक इनकी टेस्टिंग की जानी चाहिए। इसके अलावा एआई रेगुलेशन पर भी काम किए जाने की जरूरत है। अन्यथा इसके काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मेडिकल और बाकी दूसरे क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को काफी सावधानी पूर्ण ढंग से रेगुलेट करना होगा।

स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बहुत बड़ा उपयोग कृषि क्षेत्र में है। इसके उपयोग से कृषि उपज में शानदार ढंग से वृद्धि लाई जा सकती है। एआई टूल्स खास जगह की सॉइल टेस्टिंग और मौसम चक्र का अंदाजा लगाकर किसानों को बता सकते हैं कि वहां पर कौन सी फसल को उगाना फायदेमंद रहेगा? इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को काफी फायदा पहुंचेगा। 

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here