Home Breaking News Antimicrobial Resistance: वैज्ञानिकों की चेतावनी- ‘हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा’

Antimicrobial Resistance: वैज्ञानिकों की चेतावनी- ‘हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा’

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Antimicrobial Resistance: वैज्ञानिकों की चेतावनी- ‘हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा’

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”जिस तरह से कई एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग हो रहा है, हर छोटी-छोटी समस्या में हम खुद से ही बिना किसी डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का सेवन कर रहे हैं, यह हमारे शरीर में इन दवाओं के प्रति रेजिस्टेंस बनाती जा रही है। यही जारी रहा तो एक समय ऐसा आएगा जब हमें किसी संक्रमण को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उस समय ये दवाएं बिल्कुल बेअसर साबित हो सकती हैं। वह दौर किसी तबाही से कम नहीं होगा। हम साइलेंटली एक गंभीर पेंडेमिक की ओर बढ रहे हैं।” विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कई बार वैश्विक मंचों से यह चिंता जता चुका है।

पिछले महीने ही 15-18 अप्रैल के बीच कोपेनहेगन, डेनमार्क में आयोजित यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज की एक ऑनलाइन मीटिंग में भी इस गंभीर विषय को लेकर चिंता जताई गई है।

न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में संक्रामक रोगों के प्रमुख डॉ. आरोन ग्लैट कहते हैं, “एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस आधुनिक चिकित्सा की प्रमुख चिंताओं में से एक है। अगर समय रहते इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमें आने वाले दशकों में जानलेवा तबाही से दो-चार होना पड़े।

दवाओं का रेजिस्टेंस हो सकता है जानलेवा

न्यूयॉर्क के एक अखबार की रिपोर्ट में 43 वर्षीय एक व्यक्ति का जिक्र किया गया है, जो कैंसर से जूझ रहे थे और बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के लिए भर्ती थे। ट्रांसप्लांट सही तरीके से हो गया, अस्पताल से वह डिस्चार्ज होने के लिए लगभग तैयार थे लेकिन अचानक दांतों में संक्रमण और बुखार हो गया है। कुछ दिनों के भीतर, संक्रमण काफी बढ़ गया। डॉक्टरों ने इसे ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयां दीं पर आश्चर्यजनक रूप से उनका कोई असर ही नहीं हो रहा था। 

माइक्रोबायोलॉजी लैब टेस्टिंग से पता चला कि रोगी के रक्त में क्लेबसिएला नामक घातक बैक्टीरिया है और यह बैक्टीरिया अधिकांश उपलब्ध एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी है। संक्रमण बढ़ता चला गया और रोगी की मौत हो गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों के लैब टेस्टिंग रिपोर्ट्स बताते हैं कि दवाओं के प्रतिरोधी बैक्टीरिया का अनुपात बढ़ता गया। भारत में कम से कम सात लाख लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में 2050 तक दस मिलियन से अधिक लोगों के मौत की आशंका जताई गई है।

दवाओं का रेजिस्टेंस क्या होता है?

दवाओं, विशेषकर एंटीबायोटिक्स-एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का मतलब यह है कि जिन बैक्टीरिया-कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए उसे डिज़ाइन किया गया है, वह रोगाणु उसी दवा के साथ अभ्यस्त हो जाएं। ऐसा होने पर अगर आपको कोई संक्रमण होता है और इसके लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं तो उससे रोगाणु मरते नहीं हैं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। प्रतिरोधी संक्रमण का इलाज मुश्किल और कभी-कभी असंभव हो सकता है। 

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विशेष रूप से किसी बैक्टीरिया के प्रतिरोध को संदर्भित करता है। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कई प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी का प्रतिरोध माना जाता है।

क्यों हो रही है ऐसी समस्या?

सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल्स के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के कारण प्रतिरोध पैदा हो गया है। सीडीसी का अनुमान है कि क्लीनिकों और आपातकालीन विभागों में जितने लोगों को एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं उनमें से 28 फीसदी की इसकी आवश्यकता नहीं होती है।

इसके अलावा लोगों का खुद से या फिर इंटरनेट से देखकर दवाओं का सेवन करना इस समस्या को बढ़ा रहा है। हर शरीर की बनावट और आवश्यकताएं अलग हैं, सभी के लिए एक ही तरह की दवाएं काम करें यह जरूरी नहीं है।

जहां जरूरत नहीं वहां भी हो रहा है इसका इस्तेमाल

अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर अमित भार्गव कहते हैं, हमें ध्यान रखना होगा कि एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरियल संक्रमण के लिए हैं वायरल नहीं। सर्दी-जुकाम में भी कई लोग खुद से एंटीबायोटिक्स लेने लगते हैं जबकि यह वायरल संक्रमण के कारण होता है और इसपर इन दवाओं का कोई असर नहीं है। हमारे पास गांवों-कस्बों से कई मरीज गंभीर स्थिति में आते हैं, जिनमें असल बीमारी के निदान के बिना स्थानीय डॉक्टर महीनों तक एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते रहे हैं। 

इसके अलावा इंटरनेट-यूट्यूब देखकर खुद डॉक्टर बनना, परिवार में किसी को अगर कोई दवा फायदा की है, वही खुद से भी लेना शुरू कर देना ये सब बहुत गंभीर स्थिति है। सिर्फ एंटीबायोटिक्स ही नहीं कई और भी दवाओं के भी रेजिस्टेंस बनते मरीजों में देखे जा रहे हैं। 

हमेशा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें। बिना प्रिस्क्रिप्शन ओवर-द-काउंटर, इंटरनेट-यूट्यूब से देखकर न तो खुद डॉक्टर बनें, न ही खुद से दवा लेना शुरू करें। दवाएं जितने फायदे के लिए बनी हैं, दुरुपयोग की स्थिति में इससे कहीं ज्यादा नुकसानदायक भी हो सकती हैं।

 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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