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Crypto Fraud: क्रिप्टो से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की ईडी जांच जारी, केंद्रीय मंत्री ने सदन में कही ये बात

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Crypto Fraud: क्रिप्टो से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की ईडी जांच जारी, केंद्रीय मंत्री ने सदन में कही ये बात

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ED investigating several cases related to crypto/digital currency frauds: MoS

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी।
– फोटो : Social Media

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय क्रिप्टोक्यूरेंसी/ आभासी डिजिटल मुद्रा धोखाधड़ी से संबंधित कई मामलों की जांच कर रहा है, जिसमें कुछ क्रिप्टो एक्सचेंज भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल पाए गए हैं। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों में आपराधिक दुरुपयोग की संभावना है। 

फेमा के तहत 289.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई

उन्होंने कहा, “प्रवर्तन निदेशालय क्रिप्टो मुद्रा यानी आभासी डिजिटल मुद्रा की धोखाधड़ी से संबंधित कई मामलों की जांच कर रहा है। क्रिप्टो एक्सचेंज भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की है। मंत्री ने कहा, ”31 जनवरी, 2023 तक इन मामलों में 936.89 करोड़ रुपये के अपराध से अर्जित संपत्ति अटैच, जब्त और फ्रीज किए गए हैं। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक पूरक पीसी (Prosecution Complaints) सहित छह अभियोजन शिकायतें (PC) पीएमएलए की विशेष अदालत के समक्ष दायर की गई हैं। मंत्री ने बताया कि इसके अलावे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (फेमा) के तहत 289.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।    

मौजूदा कानूनों के मुताबिक क्रिप्टो धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में हो रही कार्रवाई

मंत्री ने कहा कि 2,790.74 करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन के लिए फेमा के तहत क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज जानमई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसे वजीरएक्स के नाम से जाना जाता है और इसके निदेशकों को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। क्रिप्टो परिसंपत्तियां वर्तमान में भारत में अनियमित हैं। क्रिप्टो से जुड़े संबंधित धोखाधड़ी के मामलों को धोखाधड़ी और साइबर अपराध के मौजूदा कानूनों के तहत निपटाया जाता है।

 NSE के कोष से कार्वी के ग्राहकों को 414 करोड़ रुपये का  किया गया भुगतान

सरकार ने सोमवार को कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निवेशक संरक्षण कोष से मार्च 2023 तक कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) के कुल 34,497 ग्राहकों को 414.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इसके अलावा एनएसई ने अन्य बाजार अवसंरचना संस्थानों (एमआईआई) के साथ मिलकर केएसबीएल के म्यूचुअल फंड वितरण कारोबार का मुद्रीकरण किया है और 150 करोड़ रुपये की राशि का लाभ उठाया गया है। इसका उपयोग केएसबीएल के ग्राहकों को वितरण के लिए किया जा रहा है। 

क्यों किया गया कार्वी के निवेशकों को भुगतान?

यह मामला ब्रोकर कंपनी कार्वी की ओर अपने ग्राहकों को दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) का दुरुपयोग करके अपने एक डीमैट खाते में अनधिकृत रूप से अपने ग्राहकों की प्रतिभूतियों को स्थानांतरित करने से संबंधित है। एनएसई और बीएसई ने 2 दिसंबर 2019 से केएसबीएल के ट्रेडिंग टर्मिनलों को निलंबित कर दिया था और 23 नवंबर, 2020 को ग्राहकों के धन और प्रतिभूतियों का दुरुपयोग करने के लिए इसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया। इसके अलावा एनएसई ने पिछले पांच साल में 32 शेयर ब्रोकरों को डिफॉल्टर घोषित किया है।

मंत्री बोले- सेबी एक्सचेंजों के साथ मिलकर ब्रोकरों की नियमित जांच करता है

मंत्री ने कहा कि बाजार नियामक सेबी एक्सचेंजों के साथ मिलकर कुछ मानदंडों के आधार पर ब्रोकरों की नियमित जांच करता है और एक्सचेंजों के अपने नियमों और उपनियमों के अनुसार कार्रवाई करता है। एनएसई दिशानिर्देशों के तहत स्टॉक ब्रोकरों को अपने दायित्वों को पूरा करने की आवश्यकता होती है। उन्हें किसी भी कदाचार या गैर-पेशेवर आचरण में शामिल नहीं होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री चौधरी ने बताया इस मामले में निवेशकों के दावों पर एनएसई अपने उपनियमों के अनुसार विचार कर रहा है और उनका निपटान कर रहा है। 20 मार्च, 2023 तक एनएसई के निवेशक संरक्षण कोष (आईपीएफ) से 34.497 ग्राहकों को 414.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

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