[ad_1]
रूस गुप्त एजेंसी: वक्त के साथ जिस चीज में सबसे ज्यादा बदलाव आया है, वह है टेक्नोलॉजी। आज के दौर में कहीं से भी किसी का भी जासूस जा सकता है। पुराने जमाने में इंसान इंटेलीजेंस को ही सब कुछ माना जाता था। जासूस आज के दौर में भी हो रहा है। तकनीक से ही सही। लेकिन ह्यूमन इंटेलीजेंस पर आज भी टिका हुआ है। यूक्रेन से जंग के बीच खबर मिल रही है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर ने जासूसी के संस्थान को फिर से शुरू करने का फरमान जारी किया है। रूस की खुफिया एजेंसी का नाम केजीबी है। इस एजेंसी के जासूसों को अब इसी संस्थान में आतंकियों के राज उगलने की ट्रेनिंग दी जाएगी। रूस की कमान संभालने से पहले व्लादिमीर स्वयं भी जासूस रह गए हैं। 16 साल तक वे पूर्वी जर्मनी में सोवियत संघ के लिए जासूसी की बात कर रहे थे। अधिमान्यता जासूसी की अहमियत क्या होती है, यह सामान्य बखूबी समझते हैं।
.
[ad_2]
Source link