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दुनिया में सबसे महंगे स्कूल: शिक्षा एक मानवाधिकार और एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा लेखा-जोखा 26 में शिक्षा के अधिकार शामिल हैं। यह घोषणा अनिवार्य और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की मांग करती है। 1989 में अंगीकार किए गए बाल अधिकारों पर कन्वेंशन यह निर्धारित करता है कि देश की उच्च शिक्षा को सभी के लिए स्वीकार्य माना जाएगा। हालांकि सच्चाई काफी अलग है। भारत समेत कई देशों में शिक्षा लगातार व्यक्तिगत हाथों में जा रही है और खतरनाक हो रही है। स्कूल न सिर्फ नौकरी बल्कि और भी कई तरह के चार्ज पैरेंट से निजी लेते हैं।
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