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मुश्किल से परिवार का पेट पालने वाले पिता में इतनी समझ नहीं थी कि वे बच्चे के खेल को उसका कौशल समझें. एक तो पढ़ाई में कमजोर बच्चा ऊपर से दिनभर खेलता रहता. जाहिर है गरीब पिता तो नाराज ही होगा. उनकी आंखों में बेटे के क्रिकेट स्टार बनने जैसे कोई ख्वाब नहीं थे. रिंकू अपने भाइयों के साथ खूब क्रिकेट खेलता, उनका पूरा समर्थन मिला. रिंकू के क्रिकेटर बनने की बात पर कई बार पिता नाराज हुए और उनकी पिटाई भी की, ऐसा सिर्फ उन्होंने परेशानी में किया. लेकिन रिंकू कहते हैं कि क्रिकेट के पूरे सफर में मुझे लोगों का भरपूर समर्थन मिला, जिससे मुझे उस जगह तक पहुंचने में मदद मिली, जहां मैं आज हूं.” (AP)
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