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कोप्पल किला (सांकेतिक तस्वीर)।
– फोटो : Wikipedia
विस्तार
कर्नाटक का एक छोटा सा जिला है कोप्पल। चुनावी जंग में बड़े-बड़े नेताओं की सीटों के बीच यह जिला भी राजनीति की जोरदार जंग का हिस्सा बना हुआ है। यह माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म किष्किंधा में अंजेयांद्री पर्वत पर हुआ था।
हालांकि तमिलनाडु सरकार के अलावा कर्नाटक में ही गोकर्ण को लेकर भी ऐसा ही दावा किया जाता रहा है, लेकिन कर्नाटक सरकार ने इस स्थान को हनुमान जन्मस्थली के तौर पर विकसित करने का फैसला किया है। वैसे तो सभी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन विपक्षियों का यह भी मानना है कि पिछले कुछ समय में जिस तरह से कर्नाटक की भाजपा सरकार इसका प्रचार कर रही है, उसका मकसद सियासी भी है। अभी इस जिले की पांच सीटों में से तीन पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है।
एक दौर में बेल्लारी बंधु के नाम से चर्चित रहे जनार्दन रेड्डी का अपनी खुद की पार्टी से इस जिले की एक सीट पर चुनाव लड़ने से मुकाबला रोचक भी हो गया है। स्थानीय पत्रकारों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व तो बहुत सालों से है, लेकिन कुछ समय में मंदिर जाने वालों में सियासी लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। खास बात यह है कि यह होड़ सभी प्रमुख दलों में है। कोप्पल की सीट के अलावा यहां असली दंगल गंगावती सीट पर ही होगा। यहीं से रेड्डी चुनाव लड़ रहे हैं और इसी विधानसभा में जन्मस्थल भी आता है। कुल मिलाकर कोप्पल, येलबुर्गा, कुष्टगी, गंगावती और कनकगिरी नाम की पांच विधानसभाएं इस जिले में हैं। इस जिले में भाजपा के मूल वोटर माने जाने वाले लिंगायतों और कांग्रेस के कुरबा वर्ग की वोटों की संख्या अच्छी खासी है। रेड्डी की एंट्री का नुकसान किस पार्टी को होगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
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