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Interview: यूक्रेन की सांसद यूलिया क्लीमेंका बोलीं- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने लिए नई मजबूत भूमिका तलाशे भारत

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Interview: यूक्रेन की सांसद यूलिया क्लीमेंका बोलीं- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने लिए नई मजबूत भूमिका तलाशे भारत

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रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुए साल भर से ज्यादा का समय हो गया है। इसका भयंकर परिणाम यूक्रेन के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है, लेकिन अभी भी इसके अंत का कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ रहा है। इस बीच हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने यूक्रेन की सांसद यूलिया क्लीमेंका (Yulia Klymenko) से विभिन्न मुद्दों पर एक्सक्लूसिव बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-

प्रश्न- यूलिया, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुए एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। अब यूक्रेन में युद्ध की स्थिति क्या है? युद्ध के कारण आम लोगों का जन-जीवन कितना प्रभावित हो रहा है?

उत्तर- यह कहना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आम यूक्रेनवासी का जीवन युद्ध के कारण बहुत संकट की स्थिति से गुजर रहा है। हमारे बच्चे स्कूल जाते हैं और हमें यह पता नहीं होता कि हम उनसे दोबारा मिल पाएंगे या नहीं। लाखों लोग दूसरे देशों में शरणार्थी की तरह रहने के लिए मजबूर हैं। देश का अन्न उत्पादन और लोगों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हमारे देश के सकल घरेलू उत्पादन में 35 फीसदी तक की गिरावट आ गई है। आप समझ सकते हैं कि जब युद्ध बहुत खर्चीला हो गया है, हम ऐसी स्थिति में किस तरह रहने के लिए मजबूर हैं।

प्रश्न- लेकिन इतनी विपरीत परिस्थिति में भी यूक्रेन मजबूती से लड़ रहा है। इस युद्ध का परिणाम कब और किस तरह सामने आ सकता है?

उत्तर- हमारे पास इस युद्ध को जीतने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। जब आपके बीवी-बच्चों पर अत्याचार हो रहा हो, केवल अपनी सनक के कारण कोई आपको बर्बाद करने पर उतारू हो तो आप समझौते की कोई राह नहीं तलाशते, आप लड़ते हैं। हम यही कर रहे हैं। युद्ध कब तक चलेगा, इसे तो कोई भी नहीं कह सकता। शायद जब तक पुतिन चाहेंगे, तब तक युद्ध चलेगा। लेकिन हम एक बात कह सकते हैं कि हम जीतेंगे। हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

प्रश्न- यूक्रेन की ताकत का बड़ा हिस्सा अमेरिकी-यूरोपीय मदद पर निर्भर करता है। लेकिन अब ये देश भी कहने लगे हैं कि अनिश्चितकाल तक मदद नहीं दी जा सकती। क्या आपको लगता है कि अमेरिका-यूरोप आपकी पर्याप्त मदद कर रहे हैं?

उत्तर- आज की तारीख में अनुमान लगाया जा रहा है कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए 700 बिलियन डॉलर की रकम की जरूरत होगी। हम समझते हैं कि इतनी बड़ी रकम कोई देश-संस्था हमें मदद के रूप में नहीं दे सकती। लेकिन यह दुनिया को तानाशाही से बचाने की लड़ाई है। यह लाखों लोगों के जीवन के अस्तित्व की लड़ाई है जिसके लिए हमें लड़ाई लड़नी पड़ेगी। नहीं तो भविष्य में इसके गहरे दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।

हमारी उतनी मदद नहीं हो पा रही है जितनी होनी चाहिए। जो मदद हो रही है, वह बहुत धीमी गति से हो रही है। यह मदद ज्यादा तेजी और आक्रामक तरीके से होनी चाहिए। आज हमें किंडरगार्टेन स्कूलों, युद्ध लड़ने के लिए हथियारों और पुनर्निर्माण करने वाली चीजों की जरूरत है। लेकिन हमें बहुत धीमी गति से मदद मिल रही है। हमारी अपील है कि ये देश हमारी पर्याप्त मदद करें जिससे हम इस विभीषिका से निकलने में सफल हों।

प्रश्न- कहा जा रहा है कि पुतिन इस युद्ध में परमाणु हथियारों का भी उपयोग कर सकते हैं, क्या कहेंगी?

उत्तर- इस युद्ध के कारण केवल यूक्रेन के लोगों को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ रहा है। लगभग पूरी दुनिया इसका असर झेल रही है। यूक्रेन में गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने के कारण अफ्रीकी देशों में लाखों लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। पूरी दुनिया में महंगाई बेलगाम हो गई है। मुझे लगता है कि दुनिया के जिम्मेदार देश रूस को इस स्थिति में जाने से रोकने की पूरी कोशिश करेंगे क्योंकि दुनिया ने देखा है कि इस तरह की स्थिति कितनी भयानक होती है और इसका असर कितना भीषण हो सकता है।

प्रश्न- संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के बारे में क्या कहेंगी? क्या उसने रूस-यूक्रेन युद्ध में उचित भूमिका निभाई?

उत्तर- दुर्भाग्य से पिछले कई मामलों में यह देखा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र अपने निर्माण के उद्देश्यों को पूरा करने में असफल साबित हुआ है। यदि संयुक्त राष्ट्र के रहते कोई देश किसी दूसरे देश पर आक्रमण कर रहा है, वह तबाही मचा रहा है और कोई उसे रोक पाने में असफल है तो संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता ही क्या है? दुनिया को किसी शक्तिशाली देश के रहमोकरम पर नहीं छोड़ा जा सकता। मैं सभी देशों से अपील करती हूं कि वे इस संकट को पहचानें और ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश करें जिससे कोई देश किसी अन्य की संप्रभुता को संकट में न डाल सके।   

प्रश्न- एक बार यह चर्चा सामने आई थी कि चीन इस संकट का समाधान खोजने के लिए दोनों देशों से बातचीत करेगा। रूस-यूक्रेन संकट को निभाने में चीन की भूमिका को आप किस तरह से देखती हैं?

उत्तर- हमें लगता है कि चीन ने अपना पक्ष घोषित कर दिया है। वह खुलकर रूस के साथ खड़ा दिख रहा है। ऐसे में हमें उनसे कोई उम्मीद नहीं है। यदि वे शांतिवार्ता की पहल करते तो बहुत अच्छी बात होती, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं रहा है।

प्रश्न- भारत ने दोनों ही देशों से इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की थी। क्या आपको लगता है कि भारत ने इस मामले में अपनी भूमिका का सही से निर्वहन किया? 

उत्तर- मैं कहूंगी कि जिस तरह चीन एक पक्ष में खुलकर खड़ा हो गया है, इस स्थिति में भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। भारत के पास आर्थिक ताकत, दुनिया के देशों के बीच ज्यादा विश्वसनीयता और बड़ी व्यापारिक क्षमता है। अपनी इस विशाल ताकत का उपयोग कर भारत को दुनिया के नए समीकरणों में अपने लिए एक नई दावेदारी पेश करनी चाहिए। भारत के लिए दुनिया के पटल पर अपने आपको नई ताकत के रूप में उभारने के लिए बिल्कुल सही समय है।

भारत इस समय G-20 का आयोजन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक विश्व, एक परिवार, एक भविष्य’ की बात करते हैं जो बिल्कुल सही है। यह सही समय है कि इसके माध्यम से दुनिया को यह बताया जाए कि जब परिवार के एक सदस्य (यूक्रेन) का जीवन संकट में हो तो पूरा परिवार (विश्व) आराम से नहीं रह सकता। इस युद्ध की समाप्ति के मार्ग जल्द से जल्द तलाशे जाने चाहिए।  

प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए दोनों देशों से बातचीत करने की पहल की थी। क्या आपको लगता है कि उन्होंने इस मामले का हल निकालने के लिए पर्याप्त प्रयास किया?

उत्तर- हमें लगता है कि भारत ने इस मामले में अपने लिए तटस्थ होने की भूमिका चुनी है। फिर भी, भारत ने जिस तरह स्टैंड लिया है, वह प्रशंसनीय है। हम भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं। हमें लगता है कि इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता बहुत ज्यादा है। वे चाहें तो दुनिया को बेहतर बनाने में एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हमें लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी इस समय घरेलू राजनीति में ज्यादा उलझे हैं, उन्हें अपनी महान क्षमता का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मजबूत बनाने के लिए उपयोग करनी चाहिए।

प्रश्न- इस मामले में जेलेंस्की की भूमिका की जबरदस्त आलोचना हुई है। कहा जाता है कि उन्होंने इस मामले को सही तरीके से हैंडल नहीं किया जिसके कारण यूक्रेन और पूरी दुनिया इस अनचाहे युद्ध के जाल में फंस गई। क्या कहेंगी?   

उत्तर- जब जेलेंस्की ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था, तब हमें भी उनकी क्षमता को लेकर संदेह था। लेकिन विपक्षी दल की सांसद होने के बाद भी अब मैं कहूंगी कि जिस तरह उन्होंने इस भीषण समय में देश को संभाला है, वह प्रशंसा के योग्य है। उन्होंने युद्ध के मोर्चे पर उपस्थित रहने के साथ-साथ शांति के उपाय तलाशने और लोगों की जरूरतों को पूरा करने में स्वयं को झोंक दिया है। ऐसे समय में भी वे मजबूती से हर मुश्किल का सामना कर रहे हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है। हमें लगता है कि उन्होंने बहुत मजबूती से अपनी भूमिका निभाई है। हम उम्मीद करते हैं कि हम इस युद्ध को जल्द ही जीतेंगे और इस मुश्किल स्थिति का अंत होगा।

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