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अतीक और अशरफ की हत्या करने वाले तीन में से एक कासगंज के शूटर अरुण मौर्य के गांव कादरवाड़ी में पुलिस की चहलकदमी है। शूटर के घर में ताले पड़े हुए हैं और घर के बाहर अनाज बिखरा हुआ है। इस बीच अमर उजाला की टीम जब शूटर के गांव पहुंची, तो हैरान कर देने वाली जानकारी मिली। अरुण मौर्य का गांव में बहुत आना-जाना नहीं था, लेकिन जब पिछली साल वह अपने घर आया तो गुमसुम रहता था।
गांव वाले नहीं जानते थे अरुण के पिता का असली नाम
गांव के लोगों ने बताया कि अरुण मौर्य के पिता को कोई भी दीपक नाम से नहीं जानता है। गांव में उसे सभी मैनेजर कहते हैं। प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या के बाद जब अरुण मौर्य का नाम प्रकाश में आया तो पुलिस उसके पिता दीपक को तलाशती हुई गांव में आई। ग्रामीणों ने पूछताछ के दौरान इस नाम के शख्स की पहचान करने से मना किया, लेकिन बाद में उसकी पहचान मैनेजर के नाम से हो सकी। इसके बाद ग्रामीण पुलिस को उसके घर ले गए।
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फरार हो चुका था शूटर का परिवार
हालांकि जब पुलिस गांव में पहुंची उससे पहले ही अरुण के पिता और बाकी का परिवार गांव से फरार हो चुका था। उन्हें जानकारी मिल गई थी कि बेटे अरुण ने प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या कर दी है। घर के पालतू जानवर घर के बाहर बंधे हुए थे और सामान बिखरा हुआ था। ग्रामीणों को भी ये विश्वास नहीं हो रहा था कि अरुण इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है।
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छह दिन गांव में रहा था अरुण
ग्रामीणों ने बताया कि अरुण पिछले साल गांव करीब छह दिन के लिए आया था। उसकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन वह और युवाओं की तरह न तो किसी से बात करता था और नाहीं किसी से मिलता जुलता था। साफ शब्दों में कहें तो वो गुमसुम सा रहता था। घर से निकलने के बाद कुछ देर अपने पिता के साथ गोलगप्पे की ठेल पर खड़ा हो जाता था और बाद में फिर घर में चला जाता था।
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चुप्पी के पीछे की साजिश का नहीं था अंदाजा
ग्रामीणों ने बताया कि किसी को अंदाजा भी नहीं था कि गुमसुम रहने वाले अरुण मौर्य की चुप्पी के पीछे इतना बड़ी साजिश है। क्योंकि अरुण मौर्य का कासगंज में न तो कोई आपराधिक रिकॉर्ड है और नाहीं कभी उसका किसी से झगड़ी ही हुआ।
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नहीं मिला पुराना आपराधिक इतिहास
बीते दिन प्रयागराज से आई पुलिस टीम ने कासगंज के थानों में अरुण मौर्य के आपराधिक इतिहास को लेकर छानबीन भी की, लेकिन पुलिस टीम के हाथ कुछ भी नहीं लगा।
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