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सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कई बातें कहीं। उन्होंने ड्राइवर का भी जिक्र किया। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं। दरअसल, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आजकल लोगों ने उस धारणा से दूरी बना ली है कि उनकी संतानों में एक लड़का जरूर होना चाहिए। ऐसा शिक्षा के प्रभाव और फैलाव की वजह से हुआ है। पांच जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करते हुए सीजेआई ने उस धारणा का भी जिक्र किया कि उच्च शिक्षित या संभ्रांत वर्ग के लोग ही कम बच्चे चाहते हैं।
सीजेआई ने कहा कि आज के वक्त में अगर एक महिला-पुरुष के जोड़े की बात करें तो विवाह के बाद वे या तो निसंतान हैं या फिर उनके सिर्फ एक ही बच्चा है। ऐसा शिक्षा के फैलाव, आधुनिक युग के दबाव या फिर तेजी से बढ़ती दौड़भाग की वजह से हो रहा है। इसलिए आप देखते हैं कि चीन जैसे देश भी अब जनसांख्यिकीय लाभांश में नुकसान उठा रहे हैं। इसकी वजह है- तेजी से बुजुर्ग होती जा रही आबादी।
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