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रिपोर्ट : पीयूष पाठक
अलवर. क्रिकेट की दुनिया में रणजी खेलना भी काफी महत्त्वपूर्ण होता है. प्रमोद यादव अलवर के पहले क्रिकेटर हैं जो रणजी टीम का हिस्सा बने हैं. 1996 से 2001 तक रणजी टीम में उन्होंने अलवर का प्रतिनिधित्व किया. 2001 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. अब वे अलवर के शालीमार सोसाइटी में बच्चों को क्रिकेट के गुर सिखाते हैं.
प्रमोद यादव का कहना है कि क्रिकेट के लिए उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया था. सुबह से लेकर शाम तक वे सिर्फ क्रिकेट खेलते थे. उनका सपना था भारत की तरफ से खेलने का, हालांकि वह पूरा नहीं हो पाया. अलवर के प्लेयर का नाम नहीं बनने के पीछे उन्होंने बताया कि अलवर में टूर्नामेंट की कमी है. जिसके चलते खिलाड़ी अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाते. जब तक प्लेयर अपने से बेस्ट के साथ नहीं खेलेंगे तब तक उन्हें अपनी कमियां पता नहीं लगेगी.
आपके शहर से (अलवर)
ऐसे हुई शुरुआत
प्रमोद यादव ने बताया कि वे अलवर के जाजोर बास के रहने वाले हैं. 1985 में वे अलवर आए थे. उनके बड़ा भाई क्रिकेट खेलते थे. उन्हें देखकर ही प्रमोद ने भी खेलना शुरू किया था. प्रमोद यादव ने बताया कि अलवर के नवीन स्कूल से पढ़ते हुए मनोज प्रधान नाम के एक खिलाड़ी ने उन्हें खेलते हुए देखा और उन्हें अलवर की टीम के ट्रायल के लिए लेकर गए. तब प्रमोद यादव अलवर की टीम के लिए सिलेक्ट हुए. शिव कुमार चोपड़ा कोच के साथ एक साल कड़ी मेहनत करने के बाद पहले ही प्रयास में उन्होंने राजस्थान की तरफ से अंडर-16 में मौका मिला. तब से लेकर 2 साल तक वे राजस्थान के लिए हाईएस्ट विकेट टेकर रहे. इसके बाद 1994 से 1995 में राजस्थान की तरफ से अंडर-19 खेले.
मोहिंदर अमरनाथ के पसंदीदा
प्रमोद यादव ने बताया कि उस समय की रणजी टीम के कोच मोहिंदर अमरनाथ कॉलविन शील्ड के मैच में आए. जहां प्रमोद यादव ने सवाई माधोपुर के खिलाफ 8.1 ओवर मे 18 रन देकर 8 विकेट लिए. वहां से रणजी ट्रॉफी टीम के कैंप के लिए प्रमोद यादव का सिलेक्शन हुआ. मोहिंदर अमरनाथ को प्रमोद यादव का बोलिंग एक्शन पसंद आया.
दिलीप ट्रॉफी का नेट सेशन
प्रमोद यादव ने बताया कि उस समय अलवर में दिलीप ट्रॉफी के दो मैच हुए. उसमें उस समय के बड़े खिलाड़ी चेतन शर्मा, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली समेत कई खिलाड़ी आए थे. उस वक्त मैंने सौरव गांगुली को तीन बार बोल्ड कर सुर्खियां बटोरी थीं. इसके बाद रेलवे के कैंप के लिए चुना गया. लेकिन रेलवे की नौकरी न होने की वजह से 1 महीने का कैम्प कर लौटना पड़ा. अगले साल कॉल्विन शील्ड में राजस्थान की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने का श्रेय मुझे मिला. इसके बाद रणजी ट्रॉफी टीम में पदार्पण का मौका मिला. 1996 से 2001 तक रणजी ट्रॉफी टीम में का हिस्सा रहा.
राजस्थान के बेस्ट प्लेयर का अवार्ड
प्रमोद यादव ने बताया कि उन्हें 1997 में राजस्थान के सीनियर बेस्ट प्लेयर के मथुरादास माथुर अवार्ड से सम्मानित किया गया था. उसके बाद 2001 तक उन्होंने रणजी टीम में अपने जलवे बिखेरे. 2001 के बाद उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया. अब प्रमोद यादव अलवर के शालीमार सोसाइटी में बच्चों को विकेट के गुर सिखाते हैं.
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Tags: Alwar News, Rajasthan news, Ranji Trophy
FIRST PUBLISHED : April 21, 2023, 14:55 IST
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