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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में अब मोटा अनाज यानी ‘मिलेट’ का प्रचलन शुरु होने जा रहा है। 11 लाख की संख्या वाले इन बलों के जवानों और अधिकारियों के खाने में मिलेट को स्थायी रूप से शामिल किया जाएगा। सीएपीएफ और असम राइफल में यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। 19 अप्रैल को नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृह मंत्रालय में हुई सभी केंद्रीय बलों की बैठक में यह फैसला लिया गया है। अभी तक जो स्वादिष्ट पकवान, चावल, गेहूं, सूजी या किसी अन्य उत्पाद की मदद से तैयार होते थे, अब उन्हें मिलेट से तैयार किया जाएगा। मोटे अनाज से ही पकौड़ा, हलवा, खीर व डोसा सहित कई डिश तैयार होंगी। सीआरपीएफ ने तो इस बाबत अपनी सभी यूनिटों को सर्कुलर जारी कर दिया है।
19 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्रालय में मिलेट को लेकर हुई बैठक में सीएपीएफ, एनएसजी और असम राइफल में मोटे अनाज के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। प्रमुख मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, ककून, कुटकी, कोदो, सावा और चेना को शामिल किया गया है। वर्तमान में मोटे अनाज यानी मिलेट का ‘सुपर फूड’ के तौर पर प्रचार किया जा रहा है। सीएपीएफ द्वारा विभिन्न यूनिटों, सेक्टरों, ग्रुप सेंटरों और अन्य इकाइयों को भेजे सर्कुलर में मिलेट को लेकर जानकारी दी गई है। पत्र में कहा गया है कि 1965 में हरित क्रांति के दौरान मिलेट पर जोर दिया गया था। हालांकि तब भी मिलेट का देश के विभिन्न हिस्सों में परंपरागत तौर से इस्तेमाल हो रहा था।
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