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Pakistan: संसद-राष्ट्रपति के रिश्तों में बढ़ती जा रही खटास; आरिफ अल्वी ने एक और विधेयक बिना मंजूरी के लौटाया

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Pakistan: संसद-राष्ट्रपति के रिश्तों में बढ़ती जा रही खटास; आरिफ अल्वी ने एक और विधेयक बिना मंजूरी के लौटाया

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Pakistan President Alvi returns another bill seeking amendments to anti corruption laws to Parliament

शहबाज शरीफ, आरिफ अल्वी, इमरान खान
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान में जारी राजनैतिक और आर्थिक संकट के बीच, पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ अल्वी ने एक और विधेयक को संसद वापस भेज दिया है। भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में संशोधन की मांग वाले विधेयक को सदन के पास वापस भेजते हुए अल्वी ने रविवार को कहा कि इसी तरह के पिछले संशोधन को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी। वह मामला अभी भी विचाराधीन है। 

राष्ट्रीय जवाबदेही (संशोधन) विधेयक, 2023 नामक विधेयक इस महीने की शुरुआत में संसद द्वारा पारित किया गया था। जिसे बाद में राष्ट्रपति अल्वी को उनके समर्थन के लिए भेजा गया था। जिसे अब उन्होंने वापस कर दिया है। 

 राष्ट्रीय जवाबदेही (संशोधन) विधेयक, 2023 में राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के प्रमुख को 500 मिलियन रुपये से कम के आरोपों वाले भ्रष्टाचार के मामलों को संबंधित एजेंसी, प्राधिकरण या विभाग को स्थानांतरित करने का अधिकार देता है। साथ ही इसमें एनएबी के प्रमुख को लंबित पूछताछ और जांच को बंद करने का भी अधिकार देने की बात कही गई है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने एक ट्वीट कर इसके बारे में जानकारी भी दी है। राष्ट्रपति कार्यालय ने ट्वीट में कहा कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75 (विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति) के तहत विधेयक को संसद को वापस भेज दिया। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति का कहना है कि एनएबी कानून में पिछले संशोधन पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के अधीन हैं। ऐसे में जवाबदेही कानूनों में कोई और बदलाव के लिए लंबित मामले के प्रभावों की समीक्षा के साथ फिर से विचार किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि सरकार ने पिछले साल 500 मिलियन रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार के मामलों में एनएबी की भूमिका को प्रतिबंधित करने और जवाबदेही अदालत के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति के अधिकार को छीनने के लिए राष्ट्रीय जवाबदेही (दूसरा संशोधन) अधिनियम 2022 पारित किया था। उस संसोधन ने एनएबी अध्यक्ष और ब्यूरो के अभियोजक जनरल के चार साल के कार्यकाल को घटाकर तीन साल कर दिया था। राष्ट्रपति अल्वी ने इउस विधेयक पर भी हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद बीते साल 10 जून को संसद के संयुक्त सत्र में इसे मंजूरी दी गई। जिसके बाद यह कानून बन गया। हालाँकि, पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जहां यह अभी भी लंबित है। 

देश के पूर्व पीएम इमरान खान और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का  दावा है कि सत्तारूढ़ गठबंधन भ्रष्टाचार के कई मामलों से बचने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में बदलाव कर रहा है। वहीं, इस पर सरकार का दावा है कि यह संसोधन एनएबी की शक्तियों की अनावश्यक घुसपैठ को कम कर रहा है।  

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