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आज का शब्द: जप और श्रीविलास सिंह की कविता- धूप की नदी

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आज का शब्द: जप और श्रीविलास सिंह की कविता- धूप की नदी

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जप, जिसका अर्थ है- किसी मंत्र, नाम या वाक्य का बार-बार किया जाने वाला उच्चारण। प्रस्तुत है श्रीविलास सिंह की कविता- धूप की नदी
                                                                                                
                                                     
                            

मैं कब से बैठा हूँ 
अँधेरे के इस पहाड़ की 
तलहटी में, 
अभी-अभी गुज़रे हैं इधर से 
कुछ उदंड अश्वारोही 
अपनी तलवारों पर हाथ फेरते 
बेहद फूहड़ और भयानक हँसी के साथ। 

मगर इस बात को तो 
सदियाँ हो गईं। 

धुएँ के कई बादल 
मरने वालों की चीख़ों पर सवार 
इसी अँधेरे के पहाड़ में दफ़न हैं। 

मैं अपनी प्यास की कुदाल से खोद रहा हूँ 
बरसों से अपनी इच्छाओं की रेत 
फूट पड़े हैं मेरे चारों ओर 
आग बरसाती धूप के सोते। 

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8 hours ago

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