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हिंदी और पंजाबी फिल्मों में लंबी पारी खेल रहे जिमी शेरगिल फिल्म ‘माचिस’ के बाद से लगातार बढ़िया काम करते रहे हैं। ‘हासिल’, ‘मोहब्बतें’, ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्मों में जिमी के अभिनय की खूब जय जयकार हुई है। इन दिनों वह चर्चा मे हैं अपनी आने वाली फिल्म ‘आजम’ को लेकर। इस फिल्म के सिलसिले में जिमी से मुलाकात हुई तो फिर ढेर सारी बातें हुईं। हालांकि, इस दौरान किसान आंदोलन का जिक्र चलने पर वह थोड़ा खफा भी हुए। जिमी मानते हैं कि मौजूदा दौर में कंगना रणौत से बेहतर अभिनेत्री दूसरी नहीं है।
कंगना के साथ फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ में काम करने को जिमी महज एक संयोग मानते हैं, वह कहते हैं, ‘इस फिल्म को बनाने वाले आनंद एल राय मेरे दोस्त हैं। उन्होंने अपनी पहली फिल्म मेरे साथ की थी और वहीं से हमारी दोस्ती हुई। उस फिल्म का नाम ‘स्ट्रेंजर्स’ था। उसके कई साल बाद आनंद और उनके लेखक हिमांशु मेरे पास ये फिल्म लेकर आए। उन्होंने कहानी सुनाई तो मुझे सोचने की जरूरत नहीं पड़ी कि फिल्म करनी चाहिए या नहीं। ये फिल्म करने में बहुत मजा आया।’
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और, इस फिल्म की हीरोइन कंगना रणौत की बात चलने पर जिमी शेरगिल कहते हैं, ‘कंगना बहुत ही अच्छी अदाकारा हैं।मुझे लगता है उनको इस समय अपने अभिनय पर ही ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है अगर वह अपना पूरा ध्यान सिर्फ अभिनय पर लगा कर रखेंगी तो उनसे अच्छा कलाकार इंडस्ट्री में इस समय कोई नहीं है। मेरा मानना है कि बाकी सारी चीजों से उनको दूर ही रहना चाहिए।’
जिमी शेरगिल ने पंजाबी सिनेमा के लिए बहुत मेहनत की है। लेकिन, वह ये भी मानते हैं कि समय के साथ पंजाबी सिनेमा में भी बदलाव जरूरी है। जिमी के मुताबिक, ‘जब मैंने पंजाबी सिनेमा देखा तब मुझे लगा कि यहां पर एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री बनने का स्कोप है। क्योंकि पंजाबी सुनने और देखने वाले दर्शक भरे पड़े हैं। मैंने आधा आधा साल लगा कर एक एक फिल्में बनाई। 12-13 साल पहले उस दौरान ऐसी फिल्में आईं जिन्होंने कई हिंदी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। अब भी मैं साल-दो साल में मैं पंजाबी फिल्में करता रहता हूं। लेकिन अब मैं चाहता हूं कि कुछ अलग तरह का काम करूं।’
जिमी शेरगिल कहते हैं, ‘मुझे लगता है एक समय बाद फिल्मों का ट्रेंड बदलना बेहद जरुरी है। कब तक हम पंजाबी फिल्मों के नाम पर सिर्फ कॉमेडी फिल्में ही देखते रहेंगे। फिल्मों में वैरायटी लाने की बेहद जरूरत है तभी फिल्में चलेंगी। हमें अलग-अलग तरह की फिल्में बनानी होंगी। यह छोटे छोटे काम होंगे तब जा कर हम सोच सकते हैं कि पंजाबी फिल्मों की टक्कर तमिल, तेलुगू या हिंदी फिल्मों से हो सकती है।’
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