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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: मुद्दों और बयानों की सियासत के बीच किसकी होगी जीत?

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: मुद्दों और बयानों की सियासत के बीच किसकी होगी जीत?

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कर्नाटक एग्जिट पोल
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक विधानसभा  चुनावों में महंगाई-बेरोजगारी भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिक धुर्वीकरण की कोशिशें भले चुनाव प्रचार के अंतिम दौर तक चलती रही, पर मोटे तौर पर छः अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित कर्नाटक का चुनावी रुझान और राजनीतिक प्रभाव हर दल के लिए अलग-अलग  हैं। मसलन तटीय कर्नाटक, कल्याण कर्नाटक और ग्रेटर बेंगलुरु में भाजपा का प्रभाव दिखाई दिया। वहीं हैदराबाद – कर्नाटक, मध्य कर्नाटक के इलाके ओल्ड मैसूर, ग्रेटर बेंगलुरु और कल्याण-कर्नाटक में भी कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव देखा गया।

विधानसभा चुनाव प्रचार के बहुत पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पदयात्रा से लेकर चुनावी मुद्दे तैयार करने और सोशल मीडिया पर मौजूदगी के लिहाज से भी कम से कम इन चुनावों में कांग्रेस आगे दिख रही है। 

तमाम आपसी मतभेदों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार के बीच कम से कम टिकट बंटवारे के बाद अच्छा तालमेल दिखाई दिया। भाजपा का चुनाव प्रचार राज्य सरकार की उपलब्धियों, मुख्यमंत्री बासवराज  बोम्मई की नेतृत्व क्षमता और स्थानीय नेताओं के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों-रोड सो और गृहमंत्री अमितशाह की मेहनत चुनावी रणनीति और तय किए चुनावी  मुद्दों के इर्दगिर्द ही घूमता रहा।

भाजपा के कदावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री यदुरप्पा चुनावों में सक्रिय भागीदारी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमितशाह का उनके प्रति सार्वजनिक सम्मान से कम से कम लिंगायत समुदाय में भाजपा के प्रति रुझान साफ देखा गया। पर भाजपा के पास वोक्कालिगा समुदाय के  जद.एस नेता कुमार स्वामी और  कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार के कद के नेता का अभाव ओल्ड मैसूर इलाके में  भाजपा की कमजोरी की मुख्य वजह है।

ये दोनों शक्तिशाली जातियां ही किसी दल की सत्ता में वापसी और विदाई का भविष्य तय करती रही हैं। इस इलाके में कुल साठ से ज्यादा सीटें हैं।

त्रिशंकु विधानसभा परिणाम की चर्चा

पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी देवेगौड़ा के प्रभाव वाले इलाके के ज्यादातर वोक्कालिगा, कुमार स्वामी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं अथवा त्रिशंकु विधानसभा परिणाम आने की बात करते हैं। ओल्ड मैसूर रीजन के हासन, तुमकुर, माड्या, रामनगरा और आसपास के विधानसभा क्षेत्र में देवेगौड़ा परिवार का दबदबा रहा है और यहीं इस परिवार की कुल राजनीतिक पूंजी है जिसके बदौलत यह परिवार हमेशा “किंगमेकर”  की भूमिका में रहने की चाहत रखता है।

कांग्रेस की कोशिश इस चुनाव में देवेगौड़ा परिवार की राजनीतिक ताकत कमजोर करने की रही, तो भाजपा इस इलाके में  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमितशाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की सभाओं और ‘रोड शो’ के जरिए इस इलाके में अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए प्रयासरत दिखाई दी।

परिणाम के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के बेहतर चुनावी नतीजे ही किसी भी एक दल के पूर्ण बहुमत की सरकार के दावेदारी को मजबूती प्रदान करेगा तो जद एस और देवेगौड़ा परिवार के ‘किंगमेकर’ बनने की ख्वाहिश भी पूरा करेगा।

 

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