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Exclusive: ‘आवाम और PAK सेना के बीच खत्म हुआ ऐतिहासिक समझौता’, अमर उजाला से बोले इमरान के खास नेता फवाद हुसैन

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Exclusive: ‘आवाम और PAK सेना के बीच खत्म हुआ ऐतिहासिक समझौता’, अमर उजाला से बोले इमरान के खास नेता फवाद हुसैन

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Exclusive: Former Pakistan minister Ch Fawad Hussain said– historic agreement between Awam and Pak Army ended

Pakistan: Ch Fawad Hussain
– फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान गृह युद्ध की स्थिति में फंसता जा रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि स्थानीय लोगों ने सेना के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेताओं की ओर से जारी बयान ने जो हालात पैदा किए उससे समूचे पाकिस्तान में आग लग गई। पाकिस्तान के हालात पर वहां के पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने माना कि पाकिस्तानी सेना और वहां की आवाम अब आमने-सामने आ चुकी है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान में इमरान खान को देश की राजनीति से दरकिनार करके किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता है। वह दावा करते हैं कि पाकिस्तान की आवाम और पाकिस्तानी सेना के बीच हुए एक एतिहासिक समझौता था। जो इमरान खान की गिरफ्तारी के साथ खत्म हो गया। नतीजतन पाकिस्तान के हालात बेकाबू हो गए।

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अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए पाकिस्तान के पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन कहते हैं कि पाकिस्तान में इस वक्त जो हालात पैदा हुए हैं, वह आर्मी और जांच एजेंसियों के अधिकारियों की वजह से ही बने हैं। यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान के हालात तो इस वक्त श्रीलंका जैसे हो गए हैं। पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात हैं। सड़कों पर आगजनी हो रही है, सेना के मुख्यालय जलाए जा रहे हैं। इस सवाल के जवाब में चौधरी फवाद हुसैन कहते हैं कि पाकिस्तान में जो भी विरोध हो रहा है वह इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ। पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता और पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री चौधरी फवाद हुसैन कहते हैं कि ऐसे हालात के लिए जिम्मेदार वह एतिहासिक भरोसे का टूटना है, जो पाकिस्तान की आवाम और पाकिस्तान की सेना के बीच हुआ था।

फवाद हुसैन कहते हैं पाकिस्तान से इमरान खान को हटा देने से समस्या का समाधान बिल्कुल नहीं होने वाला है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान में विदेशी और आयातित सरकार चल रही है। इसलिए जब तक उस आयातित सरकार और सेना समेत खुफिया एजेंसियों पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक पाकिस्तान के हालात नहीं सुधरने वाले। फवाद हुसैन का तर्क है कि जिस तरीके से इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद समर्थकों के सब्र का बांध टूट गया, उसी के चलते जनता सड़कों पर उतर आई और विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। वह कहते हैं कि पाकिस्तान में सशस्त्र बलों और स्थानीय नागरिकों के बीच एक तरह के भरोसे का एतिहासिक समझौता हुआ था, जो पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के साथ बड़ी खाई में बदलता जा रहा है।

चौधरी फवाद हुसैन से जब यह सवाल किया गया कि पाकिस्तान तो पहले से ही बुरे हालात से जूझ रहा है। पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी तक उनकी सरकार जरूरत के सामान तक नहीं मुहैया करा पर रही है। ऐसे में पाकिस्तान के भीतर पैदा हुए गृह युद्ध जैसे हालात तो उसे श्रीलंका और अफगानिस्तान से भी बदतर हालात में पहुंचा देंगे। इस सवाल के जवाब पर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री न सिर्फ चुप्पी साध गए, बल्कि खुद को कोर्ट में होने का हवाला देने लगे। पाकिस्तान में चर्चा इस बात की भी जोरों पर है कि इमरान खान और सेना के बीच में आपस में चले युद्ध से गृह युद्ध में तब्दील हुए हालात के बाद अब इमरान खान की पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए ही प्रतिबंधित किया जा सकता है। यही नहीं पाकिस्तानी मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का दावा यह भी है कि इमरान खान पाकिस्तान की जेल से फिलहाल बहुत जल्दी वापस नहीं आने वाले। ऐसे में पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी का कोई भविष्य बचता ही नहीं है, और न ही इमरान खान समेत उनकी पार्टी के नेताओं का। इस सीधे सवाल पर भी पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन सीधा जवाब न दे कर पाकिस्तानी सेना और इमरान समर्थकों के बीच आपसी टकराव की बात करते हैं।

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दरअसल इस पूरे मामले में पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन का जोर पाकिस्तानी सेना और वहां की आवाम के बीच हुए एक एतिहासिक समझौते में पड़ने वाली दरार पर ज्यादा रहा। इसे समझाते हुए वरिष्ठ राजनयिक और भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र तो महज दिखावे के लिए ही है। वहां पर सेना की शुरुआत से सुप्रीम पावर में रही है। जब चुने हुए नुमाइंदे उनसे इतर सोच रखते हैं, या तो उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया जाता है या फिर इमरान खान की तरह जेल में डाल दिया जाता है। इसलिए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट के मंत्री रहे सदस्य का यह कहना कि सेना और जनता के बीच हुए एक समझौते के बीच में दरार पड़ रही है, इससे साबित होता है कि वहां के हालात इस वक्त किस कदर खराब हो चुके हैं। वो कहते हैं कि पाकिस्तान में चीन और अमेरिका अपने अपनी जरूरतों के हिसाब से दखलअंदाजी करता रहता है। यही वजह है कि पाकिस्तान में अस्थिरता का माहौल आज से नहीं बल्कि बंटवारे के बाद से ही बना हुआ है।

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