Home Breaking News Taj Reign of Revenge: ताज की खूनी कहानी का दूसरा सीजन रिलीज को तैयार, जानिए पहले सीजन में अब तक क्या हुआ

Taj Reign of Revenge: ताज की खूनी कहानी का दूसरा सीजन रिलीज को तैयार, जानिए पहले सीजन में अब तक क्या हुआ

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Taj Reign of Revenge: ताज की खूनी कहानी का दूसरा सीजन रिलीज को तैयार, जानिए पहले सीजन में अब तक क्या हुआ

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जी5 की वेब सीरीज ‘ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड’ के बाद अब इस सीरीज का दूसरा सीजन ‘ताज: रेन ऑफ रिवेंज’ 12 मई से स्ट्रीम होने जा रहा है। इस सीजन के ट्रेलर के मुताबिक इस बार सलीम की अपने पिता अकबर के खिलाफ बगावत ही कहानी का मुख्य आधार होगी। इस सीजन में सलीम खुद को सियासत का उत्तराधिकारी घोषित करता दिखाई देगा। सीजन दो में इतिहास के पन्नों में दबी कुछ और कहानियां उजागर होंगी, इससे पहले आइए जानते हैं कि पहले सीजन में क्या-क्या हुआ?



वेब सीरीज ‘ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड’ के पहले सीजन में 10 एपिसोड हैं। कहानी की शुरुआत युवा अकबर से होती है। कई जंग फतह करने के बाद उसके जीवन में सिर्फ एक ही कमी है और वह कमी है मुगलिया सल्तनत के वारिस की। तीन निकाह करने के बाद अकबर को कोई औलाद नहीं। शेख सलीम चिश्ती की दुआ से अकबर के तीन बेटे होते हैं। इनके बड़े होने पर अकबर के सामने समस्या यह होती है कि मुगलिया तख्त का वारिस कौन होगा?


अकबर को भी जब मुगलिया सल्तनत का बादशाह बनाया जाता है, तो उसके छोटे भाई मिर्जा हाकिम को उसकी बादशाहत पसंद नहीं। अकबर का कहना है कि जिस भाई के साथ बचपन में खेले कूदे और एक-दूसरे से बहुत प्यार था, लेकिन बड़े होने के बाद भाई ही भाई का सबसे बड़ा दुश्मन हो जाता है। इतिहास इस बात को न दोहराए इसलिए अकबर फैसला करते हैं कि मुगलिया तख्त का वारिस उसकी काबिलियत देख कर चुना जाएगा। सबसे पहले पैदा होना किसी इंसान को ताज पहनने का हकदार नहीं बना सकता है।  


सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है और अकबर के इस फैसले के बाद तीनों बेटों के बीच इस बात की दावेदारी शुरू हो जाती है कि तख्त का असली वारिस कौन होगा? बड़ा बेटा सलीम हमेशा नशे में धुत हरम की कनीज के साथ अय्याशी में डूबा रहता है। मंझला बेटा मुराद बहादुर है, उसे लड़ाई  के सारे तौर तरीके पता है, लेकिन उसके अंदर रहम नहीं है और सबसे छोटा बेटा दनियाल पांचों वक्त का नमाजी है। 


अपने बेटों की परीक्षा के लिए अकबर ‘ताज डिवाइडेट बाय ब्लड’में अपने तीनों बेटों को एक टास्क देता है, जिसमें मुराद विजयी होता है। इधर, अकबर का छोटा भाई मिर्जा काबुल से हिंदुस्तान आकर आक्रमण की तैयारी कर रहा होता है, उसे रोकने के लिए अकबर अपने बेटों को भेजता है। काबुल हमले के लिए भेजी गई सेना की कमान मुराद के हाथों में होती है। तीनों भाई काबुल में अपने चाचा के महल पर हमला कर देते हैं। एक लंबी लड़ाई के बाद उनको जीत मिलती है। फूफी पकड़ी जाती है। मिर्जा अपने बेटों के साथ वहां से भाग जाता है।


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