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कमाल किलिकडारोग्लु और रजब तैयब अर्दोआन (दाएं)।
– फोटो : Social Media
विस्तार
तीन महीने पहले ही भूकंप का कहर झेलने वाले तुर्किये में अब चुनाव के नतीजे आने लगे हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए पड़े मतों की गणना में मौजूदा प्रेजिडेंट रजब तैयब अर्दोआन बहुमत के आंकड़े से फिसलते दिख रहे हैं। उनकी पार्टी के वोटों का आंकड़ा 50 फीसदी से भी नीच फिसलता दिख रहा है, जिससे लगभग स्पष्ट है कि तुर्किये की विपक्षी पार्टी सीएचपी के नेता कमाल किलिकडरोग्लु अब दूसरे राउंड के मतदान में भी अर्दोआन को चुनौती देते नजर आएंगे। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कमाल किलिकडारोग्लु हैं कौन?
पहले जानें- अर्दोआन को किससे मिली चुनौती?
अर्दोआन के दो दशक से लंबे राष्ट्राध्यक्ष के कार्यकाल को चुनौती देने के लिए विपक्ष के छह दलों ने मिलकर मुख्य सेक्युलर विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) के नेता कमाल किलिकदरोग्लु (Kemal Kilicdaroglu) को अपना प्रत्याशी बनाया है। कमाल मौजूदा राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। अर्दोआन को भारत विरोधी कहा जाता है। अर्दोआन वही नेता हैं, जिन्होंने भूकंप के दौरान भारत के ‘ऑपरेशन दोस्त’ की मुहिम और मदद को तुरंत भूलकर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का साथ दे दिया था।
वहीं, कमाल किलिकडारोग्लू ‘तुर्किये के गांधी’ कहे जाते हैं। कमाल तुर्किये में लोगों के हक, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ते हैं। तुर्किये की मीडिया भी उन्हें कमाल गांधी कहती है। वह महात्मा गांधी की तरह की चश्मा भी पहनते हैं और पोलिटिको की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गांधी की तरह, किलिकडारोग्लू की राजनीतिक शैली भी ‘विनम्र है।
कौन हैं कमाल गांधी?
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कमाल किलिकडारोग्लू का जन्म 1948 में पूर्वी तुर्किये (तब तुर्की) के शहर टुनसेली में हुआ था। वह एक ऐसे परिवार में जन्में जो अल्पसंख्यक अलेवी विश्वास का पालन करता था। अलेविस 13वीं शताब्दी के फारसी-तुर्की दरवेश हाजी बेक्टश वेली के अनुयायी हैं जिन्होंने इस्लाम के एक गूढ़ और मानवतावादी रूप को सिखाया।
किलिकडारोग्लू ने अंकारा एकेडमी ऑफ इकोनॉमिक्स एंड कमर्शियल साइंसेज (अब गाजी विश्वविद्यालय) में अर्थशास्त्र पढ़ा और सरकार और निजी दोनों क्षेत्रों में तुर्किये के आर्थिक और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष पदों पर काबिज हुए। उन्होंने अंकारा में हैकेटपे विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया।
2002 में तुर्किये की संसद में इस्तांबुल से किलिकडारोग्लू ने सीएचपी के सदस्य के रूप में प्रवेश किया। उसी चुनाव के बाद जिसने पहली बार अर्दोआन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एडालेट वी कल्किन्मा पार्टिसि या एकेपी) को सत्ता में लाया।
इसके बाद कमाल तुर्किये में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने लगे। 2007 में वह फिर संसद के लिए चुने गए। 2009 में उन्होंने इस्तांबुल के मेयर बनने के लिए चुनाव लड़ा। इसके बाद 2010 में एक वीडियो के लीक होने के बाद कमाल की पार्टी सीएचपी के अध्यक्ष डेनिज बायकल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तब किलिकडारोग्लू को उनकी पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।
जारी है कड़ी लड़ाई
अब तक हुई वोटों की गिनती में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है। अर्दोआन और कमाल किलिकडारोग्लू के बीच राष्ट्रपति पद को लेकर काफी कड़ी लड़ाई जारी है। तुर्किये में 97 फीसदी से ज्यादा वोटों के गिने जाने तक अर्दोआन की एकेपी पार्टी को 49.4 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं, किलिकडारोग्लु की सीएचपी को 45 फीसदी वोट मिले हैं। दूसरी तरफ एक छोटी पार्टी ओगान को 5.3 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि एक और छोटे दल होमलैंड पार्टी को 0.4 फीसदी मत हासिल हुए हैं। किसी भी दल को 50 फीसदी से ज्यादा वोट न मिलने की स्थिति में पहले और दूसरे नंबर की पार्टी अगले राउंड की वोटिंग का सामना करेगी।
अर्दोआन के पिछड़ने की वजह क्या?
तुर्किये में छह परवरी को भूकंप के झटके में 50,000 से अधिकी लोगों की मौत हो गई थी। इस संकट के तीन महीने से कम समय में तुर्किये में चुनाव हुए हैं। कई जगहों पर अर्दोआन का विरोध भी हुआ है। इस साल फरवरी में आए भूकंप में जिन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा था, उनमें से ज्यादा राष्ट्रपति अर्दोआन का गढ़ था। ऐसे में तुर्किये के राष्ट्रपति के लिए यह चुनाव पहले ही मुश्किल माने जा रहे थे।
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