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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Pixabay
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देश के कई हिस्सों में इन दिनों गर्मी से लोगों का बुरा हाल है। राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में गर्मी से राहत दिलाने के लिए पंखे, कूलर फेल हो रहे हैं और बिना एसी के तो एक पल गुजारना मुश्किल हो रहा है। यह हाल तब है, जब इन दिनों तापमान 40 से 44 डिग्री तक पहुंच जा रहा है। ऐसे में जरा सोचिए कि तब क्या स्थिति होगी, जब पारा 48 से 55 के बीच होगा। देश में लू के थपेड़े 30 गुना अधिक होंगे। जिस तरह से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है और यह बढ़ता जा रहा है। इससे आशंका ये जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों का औसत तापमान अभी की तुलना में 7 से 8 डिग्री और बढ़ सकता है।
वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ग्रुप के तहत प्रमुख जलवायु वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किए गए रैपिड एट्रिब्यूशन एनालिसिस के अनुसार, दुनियाभर के हीटवेव हॉटस्पॉट्स में शुमार होने वाले इस क्षेत्र की हाई वल्नरेबिलिटी ने मौसम के असर को बढ़ा दिया। अप्रैल के दौरान, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों ने तीव्र गर्मी की लहर का सामना किया, लाओस में 42 डिग्री सेल्सियस और थाईलैंड में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तक पहुंच गया।
खतरनाक श्रेणी में 41 डिग्री सेल्सियस तापमान
शीर्ष वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट में काफी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछ सालों में हीटवेब यानी लू के थपेड़े 30 गुना अधिक होंगे। वह दिन दूर नहीं जब भारत, बांग्लादेश, थाइलैंड जैसे देशों में तापमान 55 डिग्री सेल्सियस के आसपास होगा। इस रिपोर्ट ने 41 डिग्री सेल्सियस तापमान को खतरनाक श्रेणी में रखा है। जबकि 55 डिग्री सेल्सियस तापमान को अति घातक श्रेणी में बताया गया है।
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