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सिर्फ एक बंदा काफी है
– फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
सिर्फ एक बंदा काफी है
कलाकार
मनोज बाजपेयी
,
विपिन शर्मा
,
सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ
,
अदिति सिन्हा अद्रिजा
,
इखलाक अहमद खान
,
बालाजी लक्ष्मीनरसिम्हन
,
अभिजीत लाहिड़ी
और
विवेक टंडन
लेखक
दीपक किंगरानी
निर्देशक
अपूर्व सिंह कार्की
निर्माता
विनोद भानुशाली
रिलीज डेट
23 मई 2023
यह देश संतों का देश है। संतों पर इस देश के लोगों की अटूट श्रद्धा भी रही है। उन पर एक विश्वास होता है आमजन का कि वह कुछ गलत नहीं करेंगे। ठीक वैसे ही जैसे अपने परिवार में सगे संबंधियों पर एक विश्वास होता है। फिल्म ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ के उपसंहार का एक दृश्य है जिसमें वकील सोलंकी अदालत के सामने अपनी जिरह का आखिरी हिस्सा पूरा कर रहे हैं। वह शंकर और पार्वती के संवाद का दृष्टांत देते हुए बताते हैं कि पाप, अति पाप और महापाप क्या है? रावण ने सीता का अपहरण किया, यह अति पाप है। इसका प्रायश्चित हो सकता है। लेकिन, उसने साधु वेश में एक महिला का अपहरण किया, यह महापाप है और शिव पार्वती संवाद के मुताबिक इसके लिए कोई क्षमा नहीं है। यह विश्वास को भंग करने का अपराध है। समाज या परिवार जिन पर आंख मूंदकर विश्वास करता हो, वे जब इस विश्वास का अनुचित लाभ उठाकर किसी बहू या बेटी पर हाथ डालें, तो उसकी सजा सिर्फ मृत्युदंड है।
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