[ad_1]

Narco Test
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का धरना प्रदर्शन जारी है। कुश्ती खिलाड़ियों की एक ही मांग है कि भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार किया जाए। इस बीच बृजभूषण ने झूठ-सच का पता लगाने के लिए पहलवानों को नार्को टेस्ट कराने की चुनौती दे दी। पहलवानों ने भी उनकी चुनौती स्वीकार करते हुए कहा, वे नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने इस टेस्ट की प्रक्रिया को लाइव प्रसारित करने की मांग की है। पुलिस एक्सपर्ट और मनोचिकित्सक की मानें, तो नार्को टेस्ट की वैद्यता ही संदिग्ध है। सुप्रीम कोर्ट, इस टेस्ट के परीक्षण की वैधता पर सवाल उठा चुकी है। प्राथमिक साक्ष्य के तौर पर नार्को रिपोर्ट, अदालत में स्वीकार्य नहीं है। नार्को टेस्ट के जरिए सच बाहर लाना, इसमें 50-50 का चांस रहता है। दवा के प्रभाव से अगर कोई बात बाहर आती है, तो उसका सबूत भी जुटाना पड़ता है। ऐसे में नार्को टेस्ट, पहलवानों और बृजभूषण के बीच चल रही लड़ाई का अंतिम पड़ाव है, यह कहना जल्दबाजी होगा।
यह भी पढ़ें: Wrestlers protest: मऊ में बृजभूषण सिंह का विवादित बयान, ‘ये मामला छुआछूत का है, महिला पहलवान रोग लेकर आ गई’
विशेषज्ञों की भी अलग-अलग राय संभव
दिल्ली पुलिस में स्पेशल सीपी रहे एवं गोवा के पूर्व डीजीपी डॉ. मुक्तेश चंद्र (आईपीएस) ने नार्को टेस्ट को लेकर कहा, यह साठ मिनट की प्रक्रिया, सच के करीब पहुंचने का एक प्रयास है। इसमें सफलता मिल भी सकती है और नहीं भी मिल सकती। टेस्ट की प्रक्रिया को लाइव नहीं दिखाया जाता। हालांकि उसकी वीडियोग्राफी होती है। यह सब कोर्ट पर निर्भर करता है। कोर्ट चाहे तो लाइव प्रक्रिया के बारे में कोई आदेश जारी कर सकता है। जांच रिपोर्ट को चैलेंज किया जा सकता है। बहुत से मामलों में ऐसा होता रहा है। इस टेस्ट प्रक्रिया में शामिल विशेषज्ञों की भी अलग-अलग राय संभव है। जिस व्यक्ति का टेस्ट होता है, उसे ‘सोडियम पेंटोथल’ दवा चढ़ाई जाती है। इसे व्यक्ति में चैतन्यता कम होती चली जाती है। सम्मोहक अवस्था में उस व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं। दवा के प्रभाव से व्यक्ति में संकोच खत्म हो जाता है। ऐसे में वह व्यक्ति कुछ जानकारी दे सकता है। आमतौर पर सचेत अवस्था में वो जानकारी सामने नहीं आ पाती। व्यक्ति जब बड़बड़ाने लगता है, तो उससे सवाल किए जाते हैं। उस अवस्था में व्यक्ति के झूठ बोलने की संभावना बहुत कम हो जाती है। वजह, व्यक्ति कुछ छिपाने की स्थिति में नहीं रहता।
[ad_2]
Source link